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स्वच्छ व सुंदर BRD हर व्यक्ति के अंदर एक महान चेतना कार्य करती है

उस चेतना को जगाना,दिशा निर्देश देना स्वयं को ही करना पड़ता है,इसे ही कहते है स्वयं का स्वयं पे शासन,यानी आत्मानुशासन,स्वच्छता के प्रति भी हर व्यक्ति में चेतना होती है,जिसमें चेतना सुप्त अवस्था में
होती है वो गंदगी,गंदगी करने वाले को देख कर भी निकल जाता है,वो सोचता है इससे मेरा क्या,ये मेरे मतलब का नहीं,पर जिसकी चेतना स्वच्छता के प्रति, कार्य करती है,वो स्वयं के प्रति अपने को रोक नहीं पाते है,वो कुछ नहीं तो रोक टोक ही कर लेते है,मैने देखा है बहुत सारे लोग जो पान गुटखा खाते है वो पाउच को हाथ में लेके या पिक मुंह में लेकर दबाए रखते है जब तक उनको कोई उचित जगह न मिल जाए,तभी वो पाउच,पन्नी या पिक थूकते है ,मैने देखा है गाड़ियों में जब बच्चे केले खाए या चिप्स खाते है उनके छिलके, पन्नी उसी गाड़ी में रखे रहते है और उचित जगह पे ही फेंकते है,कहने का तात्पर्य है कि उनकी चेतना स्वच्छता के प्रति जागरूक है,यही चेतना जिस दिन हर व्यक्ति में जग गई तो उस दिन से हर शहर,संस्था स्वच्छ होगा (२४५ संडे),सुबह ६.३० से ९ बजे तक BRD मेडिकल कॉलेज गोरखपुर

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