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बेंगलुरु: बनरगठा स्थित श्री खाटू श्याम गोशाला में मौनी अमावस्या पर श्रद्धापूर्वक हुआ गौ-पूजन

बेंगलुरु(दलपतसिंह भायल)
मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर बेंगलुरु के बनरगठा क्षेत्र में स्थित श्री खाटू श्याम गोशाला में धार्मिक आस्था और परंपरा से ओतप्रोत विशेष गौ-पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में राजस्थानी समाज की महिलाओं ने भाग लेकर विधिविधान से गोमाता की पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही गोशाला परिसर में श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। महिलाओं ने पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा धारण कर गायों को तिलक लगाया, फूल-मालाएं अर्पित कीं तथा दीप प्रज्वलन कर आरती उतारी। पूजा के दौरान गोमाता को गुड़, चारा और फल अर्पित किए गए। पूरे परिसर में भक्ति गीतों और मंत्रोच्चार से आध्यात्मिक वातावरण बना रहा।
राजस्थानी महिलाओं ने मौनी अमावस्या के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस दिन गौ-पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है और गौसेवा को सबसे बड़ा धर्म माना गया है।
गोशाला प्रबंधन की ओर से बताया गया कि श्री खाटू श्याम गोशाला में सैकड़ों गायों की सेवा और देखभाल की जा रही है। समय-समय पर धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से गौसंरक्षण व सेवा का संदेश समाज तक पहुंचाया जाता है। इस प्रकार के आयोजनों से नई पीढ़ी में भी धार्मिक संस्कार और सेवा भाव विकसित होता है।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने गोशाला में सेवा कार्य कर गौमाता के संरक्षण और संवर्धन का संकल्प लिया। मौनी अमावस्या के इस आयोजन ने समाज में एकता, धर्म और सेवा की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।

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