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झारखंड राज्य के दुमका जिले में स्थित विश्वप्रसिद्ध शिवमन्दिर के प्राचीन इतिहास से छेड़छाड कर लोगों को दिगभ्रमित कर रहे हैं विभिन्न मीडिया संस्थान ।

शोभाराम पंडा,बासुकिनाथ धाम (दुमका) झारखंड राज्य के दुमका जिले में अवस्थित विश्वप्रसिद्ध शिवमन्दिर बासुकिनाथ के प्राचीन इतिहास से छेड़छाड कर हजारों लोगों को एक साजिश के तहत दिगभ्रमित करने का काम विभिन्न मीडिया संस्थानों द्वारा किया जा रहा है । आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया 1872/73 के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार Tour through The Bengal provinces जो कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे के असिस्टेंट सर्वेयर मिस्टर J.D Beglar थे। जिन्होंने ब्रिटिश सरकार में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के तत्समय के के डायरेक्टर जनरल थे के निर्देशन में उनके आदेशानुसार संपूर्ण बंगाल प्रोविंस का सर्वे किया था । ज्ञात हो कि उस समय 1872/73 में बिहार राज्य का जन्म भी नहीं हुआ था । तभी बिहार एवं उड़ीसा राज्य बंगाल प्रोविंस के अंदर था । उस समय के सर्वे विभाग का डायरेक्टर जनरल, मेजर जनरल ए.कनिंघम थे । पूरा सर्वे रिपोर्ट का पुस्तक कोलकाता में स्थित गवर्नमेंट प्रिंटिंग प्रेस से प्रकाशित हुआ था । जो सन 1878 ई. में छपने के बाद प्रकाशित हुआ था । ब्रिटिश सरकार के शासन में सर्वे विभाग द्वारा मुद्रित एवं प्रकाशित द्वारा इस सर्वे के पुस्तक के पेज नम्बर 136 में बाबा बासुकिनाथ शिवलिंग की उत्पति और मंदिर निर्माण का वृहद विवरण दिया गया है । इस प्रमाणित पुस्तक के अनुसार बासुकिनाथ शिवलिंग को घने जंगलों के बीच बासु सिंह ने कंद मूल उखाड़ने के क्रम में भूमि से निकाला था । बासु ने ही शिवलिंग का पहला बार पूजा अर्चना कर गहन वन में संरक्षित किया था। बासु के नाम पर ही नागनाथ कलियुग में बासुकिनाथ कहलाए। बासु सिंह परिहार राजपूत क्षत्रिय वंश का था । बासु को पातर का विशेष उपाधि ब्रिटिश सर्वेयर द्वारा दिया गया था। बासु ही बासुकिनाथ महादेव का प्रथम पुजारी था और उनके ही वंशज कई पीढ़ियों से लेकर वर्तमान आज भी बासुकिनाथ के मुख्य पुजारी हैं । ब्रिटिश राज के सर्वे के अनुसार बाबा बासुकिनाथ का मंदिर लगवा ( हंडवा स्टेट ) के राजा बाबू गोपाल सिंह ने बनवाया था । परिहार कुल गौरव बासुकी सिंह वर्तमान में एक Legend के रुप में जाने एवं पहचाने जाते हैं । बासु सिंह परिहार के चौदह पीढ़ी के सदस्य अभी भी बासुकिनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी और पंडा हैं ।

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