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झारखंड राज्य के उपराजधानी दुमका जिला में अवस्थित हैं विश्वप्रसिद्ध बाबा बासुकिनाथ शिवमन्दिर

शोभाराम पंडा,बासुकिनाथ (दुमका )। झारखंड राज्य के दुमका जिले में विश्वप्रसिद्ध बाबा बासुकिनाथ का शिवमन्दिर अवस्थित है । जो कि बाबा बैद्यनाथ धाम से 45 किमी की दूरी पर देवघर दुमका मुख्य मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग 114 /A पर बासुकिनाथ नगर पंचायत में स्थित है । यह स्थान देवघर दुमका रेलमार्ग से जुड़ा हुआ है । रेलवे स्टेशन का नाम बासुकिनाथ ही है । बासुकिनाथ धाम का निकटतम हवाई अड्डा देवघर है । देवघर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी बासुकिनाथ से लगभग 45 किमी है । देवघर एयरपोर्ट से दिल्ली,कोलकाता,मुंबई,बैंगलोर से सीधी उड़ान सेवा उपलब्ध है । बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर में पूजा अर्चना करने के बाद श्रद्धालुओं को बाबा बासुकिनाथ मंदिर में पूजा अर्चना के दरबार में हाजिरी लगाना अनिवार्य होता है । बासुकिनाथ में पूजा अर्चना किए बिना बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा अधूरी समझी जाती है । ज्ञातव्य हो कि बाबा बैद्यनाथ धाम को दीवानी एवं बाबा बासुकिनाथ को फौजदारी दरबार कहा जाता है । आगंतुक श्रद्धालुओं की कोई भी इच्छित कामना हो,बाबा बैद्यनाथ की अनुशंसा पर बाबा बासुकिनाथ में पूजा अर्चना करने से पूरी हो जाती है । बाबा बासुकिनाथ में सावन में लगने वाला एक माह का श्रावणी मेला विश्वप्रसिद्ध है । बासुकिनाथ धाम के श्रावणी मेले को राजकीय मेला का मान्यता प्राप्त है । श्रावणी मेला में विश्व भर से बाबा बासुकिनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या प्रतिवर्ष 50 लाख से ज्यादा हो होता है । वैसे तो बासुकिनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भादो मेला, महाशिवरात्रि मेला,बसंत पंचमी एवं वैशाख महीना तथा भादो महीना में भी लगता है । यहां सालों भर यात्रियों की भीड़ पूजा अर्चना के लिए लगी ही रहती है । भारत के सभी राज्यों एवं पड़ोसी देश नेपाल एवं अन्य देशों से आये श्रद्धालुओं से बाबा बासुकिनाथ का फौजदारी दरबार गुलजार रहता है । बाबा बासुकिनाथ शिवलिंग एक स्वयंभू शिवलिंग है । जिसे वर्षों पूर्व बासुकी सिंह जो परिहार राजपूत ( क्षत्रिय) था। बासु ने शिवलिंग को कंद मूल उखाड़ने के क्रम में धरती से निकाला था । बासुकी सिंह से प्रथम पूजित होने का कारण यह स्थान बासुकी के नाम पर बासुकिनाथ कहलाया । प्राचीन काल में यह स्थान दारुकावन के नाम से विख्यात था। शिवपुराण में भी इस स्थान का जिक्र आया है ।यह स्थान नागेशम दारुका वने के नाम से विश्वप्रसिद्ध है । वर्तमान में बासुकी सिंह के बाद उनके पीढ़ी से ही बाबा बासुकिनाथ के मुख्य पुजारी होते आये हैं । राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव,महाशिवरात्रि का मेला,बाबा बासुकिनाथ में प्रसिद्ध है । बाबा बासुकिनाथ मंदिर के आसपास आगंतुक श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए दर्जनों धर्मशालाएं,रेस्ट हाउस,आरामदायक होटल भी मौजूद है । सरकारी रेस्ट हाउस भी उपलब्ध है । रेलवे स्टेशन से मंदिर की दूरी लगभग डेढ़ किमी है । यहां का वातावरण सदा भक्तिमय रहता है । बासुकिनाथ से रांची,कोलकाता,भागलपुर की सीधी बस सेवा उपलब्ध है । बाबा बासुकिनाथ मंदिर की सारी व्यवस्थाएं बासुकिनाथ मंदिर न्यास समिति के अधीन है । जिनके अध्यक्ष दुमका जिले के उपायुक्त,उपाध्यक्ष जिले के पुलिस अधीक्षक,सचिव जिले के एसडीएम होते हैं । मंदिर का आय पर सरकार का अधिकार होता है । बासुकिनाथ में सभी सरकारी बैंकों की शाखाएं,डाकघर वन विभाग का रेस्ट हाउस भी मौजूद है । बाबा बासुकिनाथ मंदिर में रात्रि कालीन श्रृंगार पूजा देखने लायक होता है । बाबा बासुकिनाथ मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले सभी श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं बाबा बासुकिनाथ पूरी करते हैं । यहां सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ के उत्तरवाहिनी गंगा घाट से कांवर लाने की प्राचीन परंपराएं हैं । कांवर लाने वाले को कांवरिया कहा जाता है । जो गंगा तट में नेम निष्ठा से दो जल पात्र में गंगा जल लेकर पैदल 105 किमी की दूरी तय कर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं । कामना लिंग बाबा बैद्यनाथ को जलार्पण करने के बाद कांवरिया बाबा बासुकिनाथ के फौजदारी दरबार में हाजिर होते हैं और अति भक्ति भाव से बाबा बासुकिनाथ महादेव को गंगाजल अर्पित करते हैं । बाबा बैद्यनाथ मंदिर से बाबा बासुकिनाथ मंदिर की दूरी लगभग 45 किमी है ।

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