
राजकीय विधि महाविद्यालय झालावाड़ में स्वामी विवेकानंद जयंती पर कार्यक्रम तथा 'नई किरण नशा मुक्ति केंद्र' व्याख्यान आयोजित किया गया
‘नई किरण नशा मुक्ति केंद्र” के तत्वाधान में पाचवा विशेष व्याख्यान का आयोजन ‘‘नशा मुक्ति के लिए विधिक सेवाए” विषय पर किया गया
कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. ममता चांवला ने बताया कि आज दिनांक 16.01.26 को ‘नई किरण नशा मुक्ति केंद्र” के तत्वाधान में पाचवा विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता श्रीमति शशि गजराना मेडम ,सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण , झालावाड रही। वक्ता श्रीमति शशि गजराना मेडम ने मां सरस्वती का दीप प्रज्वलित करके कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया| अतिथि का मालार्पण कर स्वागत किया। मुख्य अतिथि ने ‘‘नशा मुक्ति के लिए विधिक सेवाए” विषय पर विचार प्रकट किए । श्रीमती शशि गजराना, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने विधि महाविद्यालय के छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों का उपयोग एक गंभीर समस्या है। यह धीरे-धीरे इसका सेवन करने व्यक्तियों को ही नुकसान नहीं पहुंचाती है अपितु परिवारों को तोड़ती है और समुदायों को कमजोर करती है। इसके प्रभाव केवल व्यसन तक ही सीमित नहीं हैं। यह दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक और सामाजिक क्षति का कारण है। उन्होंने माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्टेट ऑफ पंजाब बनाम बलविन्दर सिंह में पारित न्यायिक निर्णय के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि युवाओं की शक्ति, ऊर्जा और उद्देश्य की स्पष्टता भारत के भविष्य को बदल सकती है, बशर्ते उन्हें नशे की लत जैसे विनाशकारी प्रभावों से बचाया जाए। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संचालित योजना नशे के प्रति जागरूकता और नशा मुक्त भारत’’का मुख्य उद्देष्य भारत को नशा मुक्त बनाना है। इस योजना के तहत नषे से प्रभावित लोगों को कानूनी मदद व परिवारों को सहायता और समाज के हर वर्ग खासकर शैक्षणिक संस्थानों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना है।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए श्रीमती शषि गजराना ने विद्यार्थियों को मादक पदार्थों की रोकथाम हेतु संचालित हेल्पलाईन नम्बर 1933, नशा पीड़ितों की काउन्सलिंग हेतु संचालित हेल्पलाईन नं.14446 एवं निःषुल्क विधिक सहायता एवं अन्य विधिक जानकारियों के संबंध में विधिक सेवा प्राधिकरण के हेल्पलाईन नं. 15100 एवं विधिक सेवा प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं एवं बाल विवाह रोकथाम अभियान के बारे में भी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हमारी युवा पीढ़ी खासकर किशोर तथा युवा आधुनिक समय में तनावग्रस्त जीवन से परेशान होकर नशे का सेवन करने लगते है तथा इससे उनका जीवन और भी ज्यादा कष्टप्रद हो जाता है | हमें लोगो को जागरूक करके नशे के सेवन होने वाली बुराइयों के बारे में बताना चाहिए जिससे समाज तथा परिवार दोनों को कष्ट होता है | नशे की खेती करने वाले तथा उनका अवैध व्यापार करने वालो पर रोक लगाना आवश्यक है| समस्त लोगो के बीच सवेंदीकरण कार्यक्रम चलाकर नशे से होने वाली सामाजिक बुराइयों को रोका जा सकता है| नालसा की विधिक सेवा योजना नशा पीड़ित व्यक्तियों के पुर्नवास, इलाज एवम समाज में उन्हें सुयोग्य बनाने हेतु प्रेरित करने के लिए बनाई गई है| नशे का अवैध व्यापार करने वालो, अवैध विपणन करने वाले लोगो को चिन्हित कर रोकना इसका लक्ष्य है| इसके अतिरिक्त उन्होंने जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा चलाई जा रही विभिन्न नि:शुल्क विधिक सेवा योजना के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया| विधिक सेवाओ की आवश्कता क्यों ? उन्होंने बताया की भारतीय संविधान का अनुच्छेद 39A, न्याय को बढ़ावा देने और समान अवसर सुनिश्चित करते हुए मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करने के राज्य के कर्तव्य पर जोर देता है। अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 22(1) (गिरफ्तारी के आधार की जानकारी पाने का अधिकार) भी राज्य के लिए यह सुनिश्चित करना अनिवार्य बनाता है कानून के समक्ष समानता एक कानूनी प्रणाली जो समान अवसर के आधार पर न्याय को बढ़ावा देती है कानूनी सहायता कार्यक्रमों का विचार वर्ष 1950 के दशक में प्रस्तावित किया गया था, और कानूनी सहायता गतिविधियों की निगरानी के लिए वर्ष 1980 में न्यायमूर्ति पीएन भगवती की अध्यक्षता एक राष्ट्रीय समिति की स्थापना की गई थी। विधिक सेवा प्राधिकार अधिनियम वर्ष 1987 में अधिनियमित, यह अधिनियम कानूनी सहायता कार्यक्रमों के लिए एक वैधानिक आधार प्रदान करता है, जिसका लक्ष्य पात्र समूहों को मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करना है। इनमें महिलाएं, बच्चे, एससी/एसटी और ईडब्ल्यूएस श्रेणियां, औद्योगिक श्रमिक, विकलांग व्यक्ति और अन्य शामिल हैं। 1995 में स्थापित NALSA, कानूनी सहायता कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन करता है, उपलब्धता के लिए नीतियां निर्धारित करता है। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA), जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) और तालुक विधिक सेवा समितियां कानूनी सहायता कार्यक्रमों को लागू करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क बनाती हैं।यह कानूनी सहायता योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों और गैर सरकारी संगठनों को धन और अनुदान भी वितरित करता है। संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में SLSA, NALSA की नीतियों को लागू करते हैं, लोगों को मुफ्त कानूनी सेवाएं देते हैं और लोक अदालतों का संचालन करते हैं। जिला न्यायाधीशों की अध्यक्षता में DLSA जिलों में काम करते हैं और विभिन्न कानूनी सेवाएं प्रदान करते हैं। वरिष्ठ सिविल न्यायाधीशों के नेतृत्व में तालुक कानूनी सेवा समितियां, तालुकों में कार्य करती हैं, कानूनी जागरूकता शिविरों का आयोजन करती हैं, मुफ्त कानूनी सेवाएं प्रदान करती हैं, प्रमाणित आदेश प्रतियां और अन्य कानूनी दस्तावेजों की आपूर्ति और प्राप्त करती हैं।
कार्यक्रम में झालावाड़ मेडिकल काॅलेज के फोरेंसिक विभाग के डाॅ. प्रवीण शेखावत ने अपने सम्बोधन में उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने एक बार कहा था, आप जो भी सोचेंगे, वही बनेंगे। अगर आप खुद को कमजोर समझते हैं, तो आप कमजोर बनेंगे। अगर आप खुद को मजबूत समझते हैं, तो आप मजबूत बनेंगे।” युवाओं के लिए एक सच्चे प्रेरणास्रोत, स्वामी विवेकानंद ने युवा मन को नशीली दवाओं के सेवन जैसी हानिकारक आदतों से दूर रहने का मार्गदर्शन दिया। उनका मानना था कि जो भी चीज किसी व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक या भावनात्मक रूप से कमजोर करती है, उसे जहर की तरह त्याग देना चाहिए। उन्होंने युवाओं को अपनी ऊर्जा और बुद्धि का इस्तेमाल राष्ट्र निर्माण के लिए करने के लिए प्रोत्साहित किया, न कि खुद को नष्ट करने के लिए।स्वामी विवेकानन्द जी की जीवनी के बारे में अतिथि श्री प्रवीण शेखावत ने बताया की जन्म 12-01-1863 को कलकत्ता में हुआ था। इनका बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ था। इनके पिता श्री विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे। उनके पिता पाश्चात्य सभ्यता में विश्वास रखते थे। वे अपने पुत्र नरेन्द्र को भी अँग्रेजी पढ़ाकर पाश्चात्य सभ्यता के ढर्रे पर चलाना चाहते थे। इनकी माता श्रीमती भुवनेश्वरी देवीजी धार्मिक विचारों की महिला थीं। उनका अधिकांश समय भगवान् शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था। नरेन्द्र की बुद्धि बचपन से बड़ी तीव्र थी और परमात्मा को पाने की लालसा भी प्रबल थी। इस हेतु वे पहले ‘ब्रह्म समाज’ में गये किन्तु वहाँ उनके चित्त को सन्तोष नहीं हुआ। वे वेदान्त और योग को पश्चिम संस्कृति में प्रचलित करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान देना चाहते थे।
मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न भेंट किया गया। अंत में नई किरण नशा मुक्ति के कार्यक्रम की प्रभारी डॉ. ममता चावला ने अतिथि को धन्यवाद देकर कार्यक्रम का सम्पन्न किया। सहायक आचार्य हरिओम सिंघल कार्यक्रम में मंच संचालन किया| कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।