
रायपुर: नियमों को ताक पर रखकर दौड़ रहीं प्राइवेट कारें, टैक्सी बन कर रही अवैध कमाई; कमर्शियल वाहन मालिकों को हो रहा भारी नुकसान
राजधानी रायपुर की सड़को
राजधानी रायपुर की सड़कों पर इन दिनों मोटर व्हीकल एक्ट की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर में धड़ल्ले से निजी वाहनों (Private Number Plates) का इस्तेमाल कॉमर्शियल टैक्सी के रूप में किया जा रहा है, जिससे नियम से चलने वाले और टैक्स भरने वाले टैक्सी चालकों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
रायपुर में कई लोग अपनी निजी कारों (सफेद नंबर प्लेट) को ओला, उबर, इनड्राइव या निजी बुकिंग के जरिए टैक्सी के तौर पर चला रहे हैं। जबकि कमर्शियल टैक्सी (पीली नंबर प्लेट) चलाने वाले मालिक सरकार को भारी-भरकम टैक्स, परमिट फीस और इंश्योरेंस देते हैं। अवैध रूप से चल रही इन प्राइवेट गाड़ियों के कारण कमर्शियल टैक्सी चालकों को रोजाना हजारों का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
कानून और धाराओं का खुला उल्लंघन:
निजी वाहन को भाड़े पर चलाना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) के तहत एक दंडनीय अपराध है:
धारा 66 (Section 66): इस धारा के अनुसार, किसी भी वाहन का उपयोग परिवहन वाहन (Transport Vehicle) के रूप में करने के लिए 'परमिट' होना अनिवार्य है। निजी वाहनों के पास यह परमिट नहीं होता।
धारा 192A (Section 192A): बिना परमिट के वाहन का कमर्शियल उपयोग करने पर इस धारा के तहत सख्त कार्यवाही का प्रावधान है। इसमें 10,000 रुपये तक का जुर्माना या कारावास, या दोनों हो सकते हैं।
प्रशासन से मांग:
टैक्सी चालकों और संगठन का कहना है कि आरटीओ (RTO) और ट्रैफिक पुलिस को इस अवैध कारोबार पर तत्काल रोक लगानी चाहिए। जो लोग सरकार को टैक्स नहीं दे रहे, वे सवारी ढो रहे हैं और जो ईमानदारी से टैक्स भर रहे हैं, उनकी गाड़ियां खड़ी हैं।
निष्कर्ष:
अगर जल्द ही प्रशासन ने धारा 192A के तहत इन निजी वाहनों पर शिकंजा नहीं कसा, तो टैक्सी यूनियन बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, गौरव सिंह, AIMA न्यूज़।