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छत्तीसगढ़ की 'सुशासन' वाली पहल: रजिस्ट्री के साथ अब तत्काल नामांतरण, बिचौलियों का खेल खत्म

रायपुर/जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के किसानों और आम जनता के हक में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण (Mutation) की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से लागू कर दिया है। सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले से अब जमीन खरीदारों को पटवारी कार्यालयों और दलालों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
​रजिस्ट्री और नामांतरण: अब एक ही साथ
​पहले जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण के लिए महीनों तक भटकना पड़ता था, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों को बढ़ावा मिलता था। लेकिन अब रजिस्ट्री होते ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। इस पारदर्शी व्यवस्था को लागू करने में वर्तमान वित्त मंत्री और जांजगीर-चांपा के पूर्व कलेक्टर श्री ओपी चौधरी का विजन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके प्रशासनिक अनुभवों और जनता के प्रति संवेदनशीलता का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में तकनीक के माध्यम से व्यवस्थाएं सरल हुई हैं।
​15 दिन में डायवर्शन: 'ऑटो-मोड' पर काम
​जनता के लिए दूसरी बड़ी खुशखबरी जमीन के डायवर्शन (Land Diversion) को लेकर है। अब आवेदन करने के मात्र 15 दिनों के भीतर डायवर्शन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। शासन के नए नियमों के अनुसार:
​आवेदन के 15 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को कार्यवाही पूरी करनी होगी।
​यदि 15 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती, तो 16वें दिन वह आवेदन स्वतः (Automatic) स्वीकृत माना जाएगा।
​"यह सरकार की एक सराहनीय पहल है। जिस तरह से वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी जी के मार्गदर्शन में इन प्रक्रियाओं को सुगम बनाया गया है, उससे भ्रष्टाचार और लेटलतीफी पूरी तरह खत्म हो गई है। ऐसी व्यवस्था पूरे देश में लागू होनी चाहिए।" — जांजगीर जिले के जागरूक नागरिक
​आम जनता को सीधा लाभ
​पैसे की बचत: दलालों को दी जाने वाली अवैध राशि पर रोक लगी।
​समय की बचत: सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर काटने से मुक्ति।
​पारदर्शिता: ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हुई।
​छत्तीसगढ़ सरकार का यह मॉडल आज पूरे देश के लिए एक मिसाल बन रहा है, जहाँ तकनीक और इच्छाशक्ति के मेल से आम आदमी का जीवन सुगम हो रहा है।

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