
डाडामंडी में खेल महाकुंभ का भव्य आगाज, युवा खिलाड़ियों ने दिखाया जोश और प्रतिभा
द्वारीखाल संबाददाता कमल उनियाल
पौड़ी जनपद के विकास खंड द्वारीखाल स्थित क्रीड़ा स्टेडियम डाडामंडी में खेल महाकुंभ का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। इस खेल महाकुंभ में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों और गांवों से आए युवा खिलाड़ियों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया और अपनी खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना रहा।
खेल महाकुंभ का उद्घाटन मुख्य अतिथि ग्राम प्रधान बौंठा राकेश देवरानी ने किया, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में क्षेत्र पंचायत सदस्य भलगांव लफीतन बेगम उपस्थित रहीं। अतिथियों ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया और खेलों के माध्यम से अनुशासन, टीम भावना और स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर नोडल अधिकारी एवं प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज द्वारीखाल रमाकांत डबराल ने प्रतिभागियों को विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं, नियमों तथा पुरस्कार धनराशि की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खेल महाकुंभ जैसे आयोजन ग्रामीण युवाओं के लिए अपनी पहचान बनाने का सुनहरा अवसर होते हैं, जहां से खिलाड़ी ब्लॉक, जनपद और राज्य स्तर तक आगे बढ़ सकते हैं।
खेल महाकुंभ के आगाज के साथ ही खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया। कबड्डी प्रतियोगिता में राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राजबाट ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि राजकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बसिज्ञना उपविजेता रही।
दौड़ प्रतियोगिताओं में भी खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। 60 मीटर दौड़ (सीनियर वर्ग) में देवांश नेगी ने प्रथम स्थान हासिल किया, 1500 मीटर दौड़ में अमन रावत विजेता रहे, वहीं 100 मीटर दौड़ में रिद्धिमा ने प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा साबित की।
प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को नगद पुरस्कार, मेडल और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार वितरण के दौरान खिलाड़ियों के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास साफ नजर आया।
खेल महाकुंभ को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में व्यायाम शिक्षक प्रमोद कुकरेती, गजपाल गुसाईं, ममता कठेत और विविक नैथानी का विशेष योगदान रहा। आयोजकों और शिक्षकों की मेहनत से यह आयोजन क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गया।
खेल महाकुंभ ने यह संदेश दिया कि यदि ग्रामीण प्रतिभाओं को सही मंच और मार्गदर्शन मिले, तो वे खेल के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छू सकते हैं।