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मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन रैली के समापन पर फेडरेशन प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

सारंगढ़।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर शासन द्वारा घोषित वादों और गारंटियों को लागू कराने की मांग को लेकर सारंगढ़ में हजारों की संख्या में कर्मचारियों ने जोरदार जंगी रैली निकाली। यह रैली “मोदी की गारंटी लागू करो” अभियान के तहत आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों के कर्मचारी एवं अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। रैली के उपरांत कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
फेडरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह आंदोलन द्वितीय चरण के फिल्ड-स्तरीय “कलम बंद–काम बंद” आंदोलन का हिस्सा था, जो 29 से 31 दिसंबर 2025 तक संचालित किया गया। आंदोलन के अंतिम दिन कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर शक्ति प्रदर्शन किया और शासन के प्रति अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
जंगी रैली में उमड़ा कर्मचारियों का सैलाब
सारंगढ़ शहर के प्रमुख मार्गों से होकर निकली रैली में कर्मचारी हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर नारेबाजी करते नजर आए।
“मोदी की गारंटी लागू करो”,
“कर्मचारियों का हक दो”,
“लंबित मांगें पूरी करो”
जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। रैली में शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व, पंचायत, नगरीय प्रशासन, महिला एवं बाल विकास, वन, लोक निर्माण सहित अनेक विभागों के कर्मचारी-अधिकारी शामिल रहे।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
रैली के समापन पर फेडरेशन प्रतिनिधिमंडल ने अपर कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कर्मचारियों की लंबित मांगों को विस्तार से उल्लेखित करते हुए शासन से शीघ्र निराकरण की मांग की गई। कर्मचारियों ने कहा कि यदि शासन ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रमुख मांगें
कर्मचारी–अधिकारी फेडरेशन द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगों में—
महंगाई भत्ता (DA) की शेष किस्तों का तत्काल भुगतान,
बकाया एरियर्स का समायोजन,
समय पर पदोन्नति एवं वेतन विसंगतियों का निराकरण,
रिक्त पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू करने,
संविदा एवं अस्थायी कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण नीति,
सेवा-शर्तों में सुधार एवं कर्मचारी हितैषी निर्णय,
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पेंशन एवं ग्रेच्युटी प्रकरणों के त्वरित निराकरण जैसी मांगें शामिल हैं।
फेडरेशन नेताओं का बयान
फेडरेशन पदाधिकारियों ने कहा कि चुनाव के दौरान कर्मचारियों से कई वादे किए गए थे, लेकिन अब तक उन पर अमल नहीं हुआ है। बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है, तो उसे अपनी गारंटियों को जमीन पर उतारना होगा।
नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है, लेकिन यदि मांगों की अनदेखी जारी रही तो कर्मचारी वर्ग मजबूर होकर अनिश्चितकालीन आंदोलन की राह अपनाएगा।
प्रशासन को दी चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से फेडरेशन ने शासन-प्रशासन को आगाह किया कि आने वाले दिनों में आंदोलन का स्वरूप और अधिक तीखा हो सकता है। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी। कर्मचारियों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।
— ब्यूरो रिपोर्ट | आइमा मीडिया

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