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पिड़ावा, सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद पदयात्रा का अंतिम दिन रहा, जहां ग्रामीणों ने बिजली, पेयजल और सड़कों से जुड़ी अपनी समस्याएं बताईं। यह पदयात्रा धरोनिया से शुरू होकर सरोनिया, ओड़िया खेड़ी और मायाखेड़ी तक निकाली गई।
पदयात्रा के दौरान ग्रामीणों ने जगह-जगह सांसद का फूल-मालाओं से स्वागत किया। सरोनिया पहुंचने पर सरपंच दिनेश पाटीदार के साथ ग्रामीणों ने सांसद सिंह को अपनी समस्याएं बताईं।
ग्रामीणों ने सरोनिया से ओड़ियाखेड़ी रोड और सरोनिया से पिड़ावा रोड गुराड़िया तक क्षतिग्रस्त सड़कों के निर्माण की मांग की। इस पर सांसद ने सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधीक्षण अभियंता मुकेश मीणा को सड़कों की तत्काल मरम्मत करने के निर्देश दिए।

इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों ने गांव में झूलते हाई-टेंशन बिजली के तारों को ठीक करने की भी मांग उठाई।
सांसद दुष्यंत सिंह ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि पूर्व में भी कई विकास कार्य हुए हैं और अब जो भी कमियां सामने आएंगी, उन्हें प्राथमिकता से हल किया जाएगा।
पदयात्रा के समापन पर दिलावरा रोड पर पिड़ावा मंडल अध्यक्ष राजू माली के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सांसद का स्वागत किया। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा, श्याम सुंदर शर्मा, संजय जैन ताऊ, जिला प्रमुख प्रेम बाई दांगी, भागचंद दांगी, प्रधान सीताकुमारी भील, प्रकाश वर्मा, मंडल अध्यक्ष राजू माली, नारायण सिंह, जीवन्धर कासलीवाल, कमल कासलीवाल, दिनेश पाटीदार, लाल सिंह, राकेश मीणा, जीवन टंडेल, प्रकाश सिंह और दिनेश दांगी सहित कई कार्यकर्ता व पदाधिकारी मौजूद रहे
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भवानीमंडी सर्किल में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पगारिया पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गश्त के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 1.665 किलोग्राम अवैध अफीम जब्त की है।
जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया- पुलिस मुख्यालय जयपुर के निर्देशानुसार अवैध मादक पदार्थों की तस्करी की रोकथाम के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। थानाधिकारी पगारिया किशोर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की। गश्त के दौरान सिंहपुर से धनवाड़ा (मध्य प्रदेश) जाने वाले मार्ग पर संदिग्धों की तलाशी ली गई।
इस दौरान पवन पुत्र बद्रीलाल ढोली (23) और बबलू मेघवाल पुत्र लक्ष्मण लाल (23), निवासी बिस्तुनिया पगारिया को गिरफ्तार किया गया। तलाशी में उनके पास से 1.665 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद हुई।

पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले का अनुसंधान थाना गंगधार के थानाधिकारी उपनिरीक्षक अमरनाथ जोगी द्वारा किया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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नव नियुक्त जिला कांग्रेस अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह गुर्जर का भवानी मंडी पहुंचने पर स्वागत किया गया। यह कार्यक्रम ब्लॉक एवं नगर कांग्रेस कमेटी द्वारा एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित हुआ।
स्वागत समारोह का नेतृत्व ब्लॉक अध्यक्ष रोड़ सिंह परमार, नगर अध्यक्ष विनय आसतौलिया और विधानसभा प्रत्याशी चेतराज गहलोत ने किया। ब्लॉक कांग्रेस प्रवक्ता अख़्तर अली ने बताया कि जिला अध्यक्ष के साथ प्रदेश सचिव देवकीनंदन वर्मा, पीसीसी सदस्य सिद्दीक भाई गौरी और मनोहर थाना विधानसभा प्रत्याशी नेमीचंद मीणा भी मौजूद रहे।
कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष गुर्जर ने आलाकमान का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह सभी के सहयोग से आलाकमान द्वारा जताए गए विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने भवानी मंडी में फिर से कांग्रेस का बोर्ड बनाने का भी विश्वास दिलाया।
ये रहे मौजूद
इस दौरान पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष नारायण सिंह चौहान, प्रदेश सचिव चंद्र सिंह राणा, नगर पालिका अध्यक्ष कैलाश बोहरा, उपाध्यक्ष अनिल मीणा, पूर्व सरपंच रोड सिंह कुंडी खेड़ा, सरपंच बहादुर सिंह गुर्जर, पंचायती राज संगठन जिला अध्यक्ष जोरावर सिंह चौहान, एडवोकेट श्याम सिंह, वरिष्ठ कांग्रेस नेता लोकेश गुप्ता, पगारिया उप सरपंच तुफान सिंह परमार, सुदीप सालेचा, उमराव सिंह, अर्जुनसिंह मालाखेड़ा, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रमोद जैन पिंटू, कृपाल सिंह चौहान कोटड़ा, मंडल अध्यक्ष कैलाश कंवर बाई, रामचंद्र वर्मा, उमराव सिंह चौहान, पार्षद हकीम खान, हरीश राठौड़, राकेश दर्पण, वीणा मेहरा, वरुण मीणा, राजिक अंसारी, अशोक बैरवा, राजेश कुमार, नगर उपाध्यक्ष हफीज खान, जिला अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ डॉ. विकास पांडे, पंचायत अध्यक्ष गोविंद सिंह चौहान, कालू सिंह चौहान, कुशाल सोलंकी, प्रबल जैन, अविनाश परमार, राकेश चांवला, हसीब चौधरी, अक्षय जैन, हलीम भाई, दीवान सिंह, नारायण सिंह लौर और शेख साबिर शामिल थे।
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झालावाड़| रेलवे ने शुक्रवार को टिकट चैकिंग अभियान के दौरान 212 जनों को बिना टिकट यात्रा करते हुए पकड़ा और उनसे 63020 रुपए जुर्माना वसूला ।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि यात्रियों में अनुशासन सुनिश्चित करने तथा बिना टिकट यात्रा और अवैध वेंडिंग पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से कोटा मंडल द्वारा कोटा, रामगंजमंडी-भवानीमंडी रेलखंड पर एक दिवसीय सघन टिकट जांच अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान बिना टिकट यात्रा, अनियमित टिकट तथा अवैध वेंडिंग से जुड़े कुल 212 प्रकरणों में नियमानुसार कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई के अंतर्गत किराया एवं जुर्माने के रूप में कुल 63,020 रुपए वसूल किए गए। जांच अभियान के अंतर्गत रामगंजमंडी एवं भवानीमंडी रेलवे स्टेशनों के प्लेटफार्म क्षेत्रों की भी सघन जांच की गई। इस अभियान में टिकट जांच दल के रूप में मुख्य टिकट निरीक्षक लक्ष्मीकांत मीना, उप मुख्य टिकट निरीक्षक दीपक शर्मा, वाणिज्य लिपिक-सह-टिकट संग्राहक विष्णु कुमारी, हेमेंद्र मीना, उमेश कुमार, ऋषभ कुमार, टिकट निरीक्षक रामेश्वर मेहरा, रेल सुरक्षा बल के कांस्टेबल, जगदीश सिंह व मंजीत चौधरी शामिल रहे।
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👉 केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने CAPF (Central Armed Police Forces) व असम राइफल्स के नॉन-ऑफिसर (जैसे कांस्टेबल, ASI, SI आदि) कर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है:
📌 सेवानिवृत्ति पर Honorary Rank (मानद रैंक) मिलेगा
🔹 जो जवान सेवानिवृत्ति (retirement) के दिन अपनी सेवा समाप्त करते हैं, उन्हें उनकी आख़िरी रैंक से एक स्तर ऊपर की मानद रैंक दी जाएगी।
उदाहरण के तौर पर:
कांस्टेबल → हेड कांस्टेबल
हेड कांस्टेबल → ASI
ASI → SI
SI → इंस्पेक्टर
राइफलमैन → हवलदार
हवलदार → Warrant Officer �
The Indian Express
🔹 यह निर्णय primarily सम्मान, आत्म-सम्मान और सेवा के प्रति उनके समर्पण को मान्यता देने के लिए लिया गया है। �
The Indian Express
⚠️ इसमें ध्यान देने वाली बात:
➡️ इस मानद रैंक के साथ कोई अतिरिक्त वेतन या पेंशन लाभ सीधे नहीं मिलेगा — इसका उद्देश्य सम्मान बढ़ाना है, न कि आर्थिक लाभ देना। �
Business Standard
📌 किन्हें मिलेगा:
✔️ जिन जवानों ने clean service record (साफ़ और अच्छे रिकॉर्ड) रखा है
✔️ पिछली 5 साल की APAR (Annual Performance Appraisal Reports) कम-से-कम “Good” रही हैं
✔️ सेवा के दौरान कोई बड़ा अनुशासनात्मक दंड नहीं मिला है
✔️ वे सभी प्रमोशन योग्यताएँ पूरी करते हैं
➡️ इसी आधार पर मानद रैंक दी जाएगी। �
Business Standard
🧠 सरकारी लक्ष्य (इस निर्णय के पीछे):
✔️ सीआरपीएफ जैसे बलों में मानवीय सम्मान/प्रशंसा देना
✔️ जवानों का मोराल (morale) और आत्म-विश्वास बढ़ाना
✔️ लंबे समय तक देश की सेवा करने वाले जवानों को सम्मानपूर्वक विदाई देना �
The Indian Express

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🚨 ब्रेकिंग न्यूज़: #अजमेर में 'मनी #हाइस्ट' जैसी वारदात, बैंक की छत काटकर #करोड़ों की चोरी
​अजमेर से इस वक्त की बड़ी खबर:
#बैंक_ऑफ_बड़ौदा की सागर शाखा में रविवार रात #फिल्मी स्टाइल में बड़ी चोरी को अंजाम दिया गया है। चोरों ने बैंक की छत काटकर लॉकर रूम में एंट्री की और करोड़ों के जेवरात लेकर फरार हो गए।
​वारदात की बड़ी बातें:
​छत से एंट्री: चोर कटर #मशीन के जरिए बैंक की छत काटकर अंदर घुसे।
​सिर्फ 2 लॉकर निशाने पर: बैंक में मौजूद 112 #लॉकरों में से चोरों ने सिर्फ लॉकर नंबर 60 और 64 को ही तोड़ा, बाकी लॉकर सुरक्षित हैं।
​1.53 करोड़ की चोरी: करीब 107.5 तोला #सोना और 850 ग्राम #चांदी चोरी हुई है, जिसकी कीमत 1.53 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
​पूर्व मंत्री के करीबी का लॉकर: लॉकर नंबर 60 पूर्व #मंत्री रघु शर्मा के पीए (PA) राजेंद्र भट्ट के बेटे का बताया जा रहा है।
​पुलिस जांच शुरू: मौके से कटर और अन्य औजार बरामद। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वॉड मौके पर मौजूद।..see more

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गाइडलाइन दर वह सरकारी तय न्यूनतम मूल्य है, जिस पर जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और टैक्स का हिसाब किया जाता है। यह बाजार भाव और वास्तविक कीमत के करीब लाने के लिए तय की जाती है ताकि रजिस्ट्री में काले धन या कम दर्ज कीमत जैसी समस्या न हो। �
The Sootr
📅 2. नवीनतम संशोधन और लागू तारीख
📍 रायपुर और कोरबा जिलों के लिए संशोधित गाइडलाइन दरें 30 जनवरी 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गई हैं। इनमें दरों को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के हिसाब से अलग-अलग रखा गया है। �
Bansal News
📉 3. शहरी बनाम ग्रामीण दरें
✔️ ग्रामीण इलाकों में राहत:
– जिन ग्रामीण इलाकों में रियल एस्टेट या प्लॉटिंग नहीं है, वहाँ की दरों में काफी कमी की गई है ताकि छोटे किसानों और आम लोगों को फायदा मिले। �
IBC24 News
✔️ शहरी इलाकों में संशोधन:
– शहरी क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों को मूल्य के करीब लाने का प्रयास किया गया है, जिससे अब स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फ़ीस सही स्तर पर आएँगी। �
The Sootr
📊 4. क्या बदल गया है?
– पहले 20 नवंबर 2025 से राज्य स्तर पर नई गाइडलाइन दरें लागू हो चुकी थीं, लेकिन रायपुर और कोरबा के लिए संशोधन प्रस्तावों को मंजूरी देकर सुधार कर उन्हें अब 30 जनवरी 2026 से लागू किया गया है। �
– इससे अब पंजीयन (रजिस्ट्री) शुल्क और स्टांप ड्यूटी इन नई दरों के आधार पर ही लगेगी। �
Bansal News
The Sootr
📌 5. जानने योग्य बातें
✅ नई दरों की पूरी जानकारी आप अपने डिस्ट्रिक्ट पंजीयन कार्यालय से या पंजीयन विभाग की वेबसाइट/सूचना बोर्ड से ले सकते हैं। �
✅ सरकार का लक्ष्य भूमि पंजीयन को पारदर्शी बनाना और बाजार मूल्य के करीब दरें सुनिश्चित करना है।

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लखनऊ।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार शाम राजधानी लखनऊ के प्रवेश द्वारों को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि लखनऊ के 07 प्रमुख प्रवेश मार्गों पर उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने वाले भव्य प्रवेश द्वार विकसित किए जाएं।मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में प्रवेश करते ही प्रदेश की गौरवशाली पहचान स्पष्ट रूप से परिलक्षित होनी चाहिए, जिससे यात्रियों को एक विशिष्ट सांस्कृतिक अनुभूति प्राप्त हो।बैठक में प्रस्तावित प्रवेश द्वारों के नाम और मार्ग इस प्रकार तय किए गए—रायबरेली–प्रयागराज मार्ग पर संगम द्वारसुल्तानपुर–वाराणसी मार्ग पर नंदी द्वारबाराबंकी–अयोध्या मार्ग पर सूर्य द्वारसीतापुर–नैमिषारण्य मार्ग पर व्यास द्वारहरदोई–हस्तिनापुर मार्ग पर धर्म द्वारआगरा–मथुरा मार्ग पर कृष्ण द्वारउन्नाव–झांसी मार्ग पर शौर्य द्वारमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन प्रवेश द्वारों के निर्माण में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का उपयोग किया जाए, ताकि सरकारी संसाधनों पर अतिरिक्त भार न पड़े।उन्होंने निर्देश दिए कि प्रवेश द्वारों के डिजाइन में भारतीय पारंपरिक वास्तुकला, शिल्पकला एवं सांस्कृतिक प्रतीकों का प्रभावी समावेश हो। पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, भित्ति चित्र (म्यूरल), फव्वारे, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था एवं हरित परिदृश्य के माध्यम से इन द्वारों को न केवल सौंदर्यपूर्ण बल्कि अर्थपूर्ण बनाया जाए।मुख्यमंत्री ने कहा कि ये प्रवेश द्वार लखनऊ की पहचान को नई ऊंचाई देंगे और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक बनेंगे।

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Umaria - Jan Jan ki Awaj
सरकारी वेतन के बावजूद रिश्वतखोरी: आखिर कब बदलेगा सिस्टम?
मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। आए दिन कोई न कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा जा रहा है। ताज़ा मामला छतरपुर जिले की नगर परिषद बकस्वाहा से सामने आया है, जहाँ आवासीय पट्टा और प्रधानमंत्री आवास दिलाने के नाम पर 30 हजार रुपये की रिश्वत लेते एक महिला अधिकारी और उपयंत्री को पकड़ा गया है।

शिकायतकर्ता हरिओम अहिरवार के अनुसार, मुख्य नगर अधिकारी ने उनके आवासीय पट्टा और पीएम आवास के आवेदन के बदले पैसों की मांग की थी। जांच में सामने आया कि राशि सीधे न लेकर उपयंत्री के माध्यम से ली जा रही थी। जैसे ही उपयंत्री ने रिश्वत की रकम ली, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। केमिकल टेस्ट में नोट गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होता…
जब सरकार आपको समय पर वेतन दे रही है, पद और सम्मान दे रही है, तो फिर रिश्वत की जरूरत क्यों?
क्या भोग-विलास की लालसा इंसान को इतना गिरा देती है?

आज यह सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल है।
क्या आपके माता-पिता ने आपको यही संस्कार दिए थे?
क्या आप अपने बच्चों को भी यही सिखाएंगे कि सरकारी कुर्सी का इस्तेमाल जनता को लूटने के लिए किया जाए?

जरा सोचिए—
क्या आप अपने परिवार, रिश्तेदारों या समाज के सामने आंख मिलाकर खड़े हो सकते हैं?
क्या यह अवैध कमाई आपको सुकून दे पाएगी?

सबसे चिंताजनक बात यह है कि भ्रष्टाचार अब अपवाद नहीं रह गया है।
आज हर दूसरा या तीसरा कर्मचारी किसी न किसी रूप में इसमें लिप्त नजर आता है।
सिर्फ रिश्वतखोर पकड़ने से समस्या खत्म नहीं होगी।
जब तक सोच नहीं बदलेगी, तब तक सिस्टम नहीं बदलेगा।

अब वक्त आ गया है कि हम सिर्फ खबर पढ़कर आगे न बढ़ें,
बल्कि एक ईमानदार, जिम्मेदार और बेहतर समाज के निर्माण की मांग करें।

क्योंकि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई
सिर्फ कानून से नहीं, चरित्र से जीती जाती है।

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सीएमएचओ कार्यालय में शहीदों की स्मृति में मौन धारण किया गया,

13 फरवरी तक आयोजित होने वाले स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान की शपथ भी ली गई

सीएमएचओ कार्यालय नर्मदापुरम में सीएमएचओ डॉ नरसिंह गहलोत के दिशा निर्देश में कार्यालय के समस्त अधिकारी कर्मचारियों ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की स्मृति में जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अपने जीवन का बलिदान दिया है 30 जनवरी 2026 को प्रातः 11.00 दो मिनिट का मौन धारण किया गया। जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ संजय पुरोहित और अधिकारी कर्मचारियों ने इस अवसर पर संकल्प लिया कुष्ठ मुक्त भारत बनाने के सभी प्रयास करेंगें। हम सब मिलकर कुष्ठ रोग के भेदभाव को खत्म कर कुष्ठ रोगियों के आत्मसम्मान को सुनिश्चित करेंगे।

डॉ पुरोहित ने बताया कि म.प्र. शासन लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग मंत्रालय भोपाल के निर्देशानुसार 13 फरवरी 2026 तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान जिले में चलाया जाएगा जिसमें पंचायतों द्वारा कुष्ठ रोग के प्रति समाज में व्याप्त भ्रांतियों एवं भेदभाव को मिटाने के लिये अपील सामान्तः पूछे जाने वाले प्रश्न एवं समाज को कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति से 'भ्रांतियों एवं भेदभाव न करने की शपथ दिलाई जाएगी, साथ ही पखवाड़ा के दौरान अधिक से अधिक नये कुष्ठ रोगी खोजें जाएंगे एवं विकास खण्ड स्तर पर पीओडी शिविर का आयोजन भी किया जाएगा। 30 जनवरी से 13 फरवरी 2026 के मध्य ग्राम सभा में कुष्ठ की जानकारी दी जाएगी। जिले के सभी सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केंद्रों में शहीदों की स्मृति में 2 मिनिट का मौन रखा गया एवं कुष्ठ स्पर्श निवारण अभियान की शुरुआत हुई।

#narmdapuram CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav Jansampark Madhya Pradesh General Administration Department, MP

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अवगत कराना है कि हम सहारा के कार्यकर्ता हैं, पिछले 15 वर्षों से चल रहे सहारा - सेबी विवाद के कारण हमारा रोजगार प्रभावित हो गया है,हम जीवन के सबसे निचले स्तर पर आ चुके हैं। स्थिति दयनीय हो चुकी है। परिवार का भरण-पोषण नहीं कर पा रहे हैं। हमारा सामाजिक स्तर भी गिरता चला जा रहा है। हम समाज में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। माननीय न्यायपालिका से करबद्ध निवेदन है कि सहारा -सेबी विवाद को समाप्त करते हुए,उचित न्याय देने की कृपा करें,जिससे समाज में हम बेहतर और सम्मान जनक जीवन जी सके।
देश की जनता को देश की न्यायपालिका द्वारा समय पर न्याय नहीं मिलना बहुत बड़ा अन्याय है। इसके लिए वर्तमान केंद्र सरकार को तत्परता दिखानी चाहिए। यह समय यादगार रहेगा, देश की जनता सहारा केस का तत्काल
निस्तारण चाहती है। आखिर आर्थिक मामले को इतना विलंब क्यों?

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लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायत के लिए शपथ पत्र अनिवार्य-- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत किसी लोक सेवक (public servant) के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत तभी प्रस्तुत की जा सकती है, जब शिकायतकर्ता पहले धारा 175(3) का अनुपालन करे।

अर्थात्, शिकायतकर्ता को यह दिखाना अनिवार्य है कि उसने पहले पुलिस अधीक्षक (Superintendent of Police) के समक्ष शपथ-पत्र (affidavit) सहित लिखित शिकायत दी थी।

यह निर्णय जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने दिया। खंडपीठ के समक्ष यह प्रश्न था कि क्या धारा 175(4) एक स्वतंत्र प्रावधान है, जिसके तहत मजिस्ट्रेट मौखिक शिकायत पर भी कार्रवाई कर सकता है, या फिर यह धारा 175(3) का ही एक प्रक्रियात्मक विस्तार है, जिसमें Priyanka Srivastava Vs. State of U.P. (2015) में निर्धारित सुरक्षा उपाय लागू होंगे।

धारा 175(3) और 175(4) का संबंध

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धारा 175(4) कोई स्वतंत्र या अलग-थलग प्रावधान नहीं है, बल्कि इसे धारा 175(3) के साथ सामंजस्यपूर्ण ढंग से पढ़ा जाना चाहिए। इसका अर्थ यह है कि:

किसी लोक सेवक के विरुद्ध मजिस्ट्रेट के समक्ष सीधे शिकायत दाखिल कर जांच का आदेश नहीं मांगा जा सकता,

जब तक कि शिकायतकर्ता यह न दिखाए कि उसने पहले धारा 173(4) BNSS के तहत पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया था और

उसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ-पत्र सहित आवेदन प्रस्तुत किया गया हो।

अदालत ने कहा:

“पुलिस अधीक्षक के समक्ष उपलब्ध उपाय का सहारा लेना, न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र को सक्रिय करने के लिए एक अनिवार्य पूर्व-शर्त है।”

प्रक्रिया को दरकिनार करने की अनुमति नहीं

अदालत ने चेतावनी दी कि यदि धारा 175(4) को एक स्वतंत्र प्रावधान मान लिया जाए, तो इससे शिकायतकर्ता कानून द्वारा स्थापित क्रमबद्ध प्रक्रिया (statutory hierarchy) को दरकिनार कर सकेगा।

ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति बिना शपथ-पत्र और बिना पहले पुलिस अधीक्षक से संपर्क किए, सीधे मजिस्ट्रेट के समक्ष लोक सेवक के विरुद्ध शिकायत कर सकेगा, जो कि विधायी मंशा के विपरीत होगा।

अदालत ने कहा कि ऐसा करने से असंगत और अवांछित परिणाम उत्पन्न होंगे, क्योंकि धारा 175(3) स्पष्ट रूप से धारा 173(4) के तहत किए गए प्रयास और शपथ-पत्र की मांग करती है, जबकि धारा 175(4) को अलग-थलग पढ़ने से यह सुरक्षा समाप्त हो जाएगी।

अदालत के निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निष्कर्ष इस प्रकार संक्षेपित किए:

धारा 175(3) और 175(4) को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ पढ़ा जाना चाहिए; धारा 175(4), धारा 175(3) का ही विस्तार है।

जांच का आदेश देने की शक्ति मुख्य रूप से धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट को प्राप्त होती है। धारा 175(4) भी यह शक्ति देती है, लेकिन लोक सेवकों से जुड़े मामलों में एक विशेष प्रक्रिया निर्धारित करती है।

धारा 175(4) में प्रयुक्त शब्द “शिकायत (complaint)” का अर्थ मौखिक शिकायत नहीं है। इसे उसी प्रकार के आवेदन के रूप में समझा जाएगा, जैसा धारा 175(3) में है—अर्थात् शपथ-पत्र से समर्थित लिखित आवेदन, जिसमें संज्ञेय अपराध के आरोप हों।

निष्कर्ष

अदालत ने दो टूक कहा कि लोक सेवकों के विरुद्ध शिकायतों में वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन अनिवार्य है, और कोई भी शिकायतकर्ता निर्धारित प्रक्रिया को छोड़कर सीधे मजिस्ट्रेट के पास नहीं जा सकता।
#लोकसेवक
#शपथपत्र
#सुप्रीमकोर्ट
#सरकारीअधिकारी

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कपकपाती ठंड, भूख और संघर्ष की जीत: मुख्य सचिव के वादे पर शांत हुआ किसानों का आक्रोश
​खेतों में दबी उम्मीदों को मिला सरकारी आश्वासन का सहारा; 15 फरवरी तक होगा नुकसान की भरपाई का भुगतान
​मल्लां वाला खास (जोगिंदर सिंह खालसा):
अपनी उजड़ी हुई फसलों और रेत में दफन हो चुके खेतों का इंसाफ मांगने के लिए हरिके हेडवर्क्स की सर्द रातों में डटे अन्नदाता की आखिर सुनवाई हो गई। एक महीने से जारी 'बाढ़ पीड़ित किसान संघर्ष मोर्चा' आज इस उम्मीद के साथ स्थगित कर दिया गया कि सरकार अपने वादे के मुताबिक 15 फरवरी तक किसानों के खाली हो चुके खातों में मुआवजे की राशि डाल देगी।
​भावुक कर देने वाला संघर्ष:
यह आंदोलन सिर्फ नारेबाजी का नहीं था, बल्कि उन पिताओं का था जिनके बच्चों की पढ़ाई दांव पर थी और उन बेटों का था जिनके बुजुर्ग बीमार थे। कड़ाके की ठंड में जब लोग घरों में दुबके थे, तब किसान भूख हड़ताल पर बैठकर सरकार के जमीर को जगा रहे थे।
​सरदार जसवीर सिंह आहलूवालिया और उनकी टीम ने कहा कि 2025 की बाढ़ ने उनकी रूह तक को छलनी कर दिया था। किसानों की मांग है कि खेतों से रेत हटाने की मोहलत दी जाए और मुआवजा बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे बैंक खातों में पहुंचे।
​हुंकार: किसानों ने जाते-जाते सरकार को चेताया है कि वे घर जरूर जा रहे हैं, लेकिन हल अभी भी कंधों पर हैं। अगर 24 फरवरी तक वादे वफा न हुए, तो संघर्ष की अगली इबारत और भी सख्त होगी।

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पटना गर्ल्स हॉस्टल मामले में सस्पेंड चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रोशनी कुमारी आभूषण की शौकीन हैं! इस बात का खुलासा उनकी ओर से किए गए 2023–24 का एसेट डिक्लरेशन में है।

सस्पेंड के बाद SHO रौशनी कुमारी का 2023–24 का एसेट डिक्लरेशन जो सार्वजनिक किया है उसके अनुसार उनके पास नकद: 25,000 रुपये, मोतिहारी में 25,000 रुपये, SBI बिश्वेश्वरैया भवन पटना में 2,35,000 रुपये हैं। अर्थात- कुल बैंक बैलेंस: 2,60,000 रुपये हैं। इसके साथ ही एक रॉयल एनफील्ड (2022 मॉडल) है। रोशनी कुमारी आभूषण की बहुत ही शौकीन है। उनके पास 232 ग्राम सोना, 2 ग्राम का हीरा और 400 ग्राम चांदी भी है। उनकी ओर से शेयर किए गए संपत्ति विवरण में किसी भी प्रकार का शेयर, बॉन्ड या अन्य निवेश की चर्चा नहीं है।

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मुंबई, जिसे सपनों का शहर कहा जाता है, अक्सर अपनी बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की समस्याओं के लिए सुर्खियों में रहता है। हाल ही में, मीरा-भायंदर में बना नया डबल-डेकर फ्लाईओवर उद्घाटन से पहले ही चर्चा और चिंता का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दृश्यों ने न केवल आम जनता बल्कि विशेषज्ञों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या यह 'विकास' है या भविष्य की 'मुसीबत'?
​आपत्ति का मुख्य कारण: 4 लेन का 'फनल' (Funnel) डिजाइन
​इस फ्लाईओवर पर सबसे बड़ी आपत्ति इसके विचित्र डिजाइन को लेकर है। करोड़ों की लागत से बना यह फ्लाईओवर शुरू तो 4 लेन की चौड़ाई के साथ होता है, लेकिन आगे चलकर अचानक यह 2 लेन में सिमट जाता है।
​एक आम नागरिक की नजर से देखें, तो यह एक 'बोटलनेक' (Bottleneck) है। जब तेज रफ्तार गाड़ियां 4 लेन से अचानक 2 लेन में प्रवेश करने की कोशिश करेंगी, तो वहां ट्रैफिक जाम होना तय है। इससे भी गंभीर बात यह है कि यह पॉइंट एक 'एक्सीडेंट प्रोन जोन' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) बन सकता है। जिस प्रोजेक्ट का उद्देश्य ट्रैफिक कम करना था, वह खुद ट्रैफिक जाम का कारण बनता दिख रहा है।
​जिम्मेदार कौन? (किन लोगों का सहयोग है)
​इस प्रोजेक्ट में किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी एक 'चेन' (Chain) का सहयोग और इंवॉल्वमेंट है, जिनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए:
​MMRDA (मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण): यह प्रोजेक्ट MMRDA की देखरेख में है। सबसे बड़ी जिम्मेदारी उनकी प्लानिंग विंग की है। क्या नक्शा पास करते समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि 4 लेन का ट्रैफिक 2 लेन में कैसे समाएगा?
​अर्बन प्लानर्स और कंसल्टेंट्स: करोड़ों रुपये की फीस लेने वाले डिजाइन कंसल्टेंट्स और आर्किटेक्ट्स, जिन्होंने इस नक्शे को मंजूरी दी। उनकी दूरदर्शिता पर सवाल उठना लाजमी है।
​कांट्रैक्टर्स (Contractors): हालाँकि कांट्रैक्टर वही बनाते हैं जो नक्शे में होता है (इस केस में J Kumar Infraprojects और अन्य एजेंसियां जो मेट्रो लाइन 9 पर काम कर रही हैं), लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी खामियों को उजागर करना भी उनकी नैतिक जिम्मेदारी होती है।
​विशेष टिप्पणी (Editorial Comment)
​MMRDA ने अपनी सफाई में कहा है कि यह डिजाइन "भविष्य के विस्तार" (Future Expansion) को ध्यान में रखकर बनाया गया है और जगह की कमी (Right of Way) के कारण ऐसा करना पड़ा।
​लेकिन, सवाल यह है:
​क्या 'भविष्य' के नाम पर 'वर्तमान' की सुरक्षा से खिलवाड़ जायज है?
​क्या मुंबई जैसे शहर में, जहां एक इंच जगह के लिए संघर्ष है, वहां ऐसी प्लानिंग की अनुमति कैसे मिली जहां पिलर और सड़क का तालमेल ही नहीं है?
​यह केवल एक फ्लाईओवर का मुद्दा नहीं है; यह हमारे सरकारी सिस्टम की उस मानसिकता का प्रतीक है जहां प्रोजेक्ट को 'पूरा' करना प्राथमिकता है, उसे 'सही' बनाना नहीं। जनता के टैक्स के पैसों से बने इस ढांचे का अगर सही इस्तेमाल नहीं हो पाया, तो यह आधुनिक इंजीनियरिंग पर एक बदनुमा दाग होगा।

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🚨 बड़ी खबर: बिहार में जमीन विवाद को लेकर अब पुलिस की 'मनमानी' खत्म! 🛑
बिहार के जमीन मालिकों और आम जनता के लिए बड़ी राहत! उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब थानों में जमीन के नाम पर होने वाला खेल पूरी तरह बंद होने जा रहा है।
📅 कब से लागू होगा?
यह नया नियम 1 फरवरी से पूरे बिहार में प्रभावी हो जाएगा।
📌 नए नियम की मुख्य बातें:
वर्दी का रौब खत्म: अब पुलिस बिना किसी सक्षम कोर्ट या प्राधिकारी के आदेश के न तो किसी की जमीन पर कब्जा दिलाएगी और न ही चल रहे निर्माण कार्य या चहारदीवारी को रुकवाएगी। ❌👮‍♂️
काम सिर्फ कानून-व्यवस्था: पुलिस की भूमिका अब केवल शांति बनाए रखने तक सीमित रहेगी। जमीन किसकी है, यह तय करना पुलिस का काम नहीं होगा।
शनिवार को होगा समाधान: हर शनिवार को अंचलाधिकारी (CO) और थाना प्रभारी (SHO) साथ बैठेंगे और जमीन से जुड़े मामलों की समीक्षा करेंगे। 🤝📑
थाना डायरी में एंट्री अनिवार्य: जमीन विवाद की शिकायत मिलते ही पुलिस को अलग रजिस्टर में पूरी जानकारी (खाता, खेसरा, रकबा) दर्ज करनी होगी और इसकी जानकारी तुरंत CO को देनी होगी।
⚖️ अब कहाँ जाना होगा?
जमीन विवाद अब पूरी तरह से राजस्व (Revenue) और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा होगा। यानी अब फैसला कोर्ट और अंचल कार्यालय से होगा, थाने की सेटिंग से नहीं! 🔨
💡 क्यों लिया गया यह फैसला?
डिप्टी सीएम ने साफ कहा है कि जमीन विवाद की आड़ में पुलिस द्वारा लोगों को डराने-धमकाने और अनावश्यक हस्तक्षेप की शिकायतें मिल रही थीं। अब भ्रष्टाचार और मनमानी पर लगाम लगेगी। 💪🚩
📢 इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि हर बिहारी को अपना अधिकार पता चल सके!

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आज दिनांक 30 जनवरी 2026 को समय करीब दोपहर 03:30 बजे, जहानाबाद रोड स्थित नौरंगा (राजू ढाबा के पास) एक भीषण सड़क हादसा हुआ। यहाँ एक तेज रफ्तार अज्ञात डंपर ने एक महिला को जोरदार टक्कर मार दी।हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को एम्बुलेंस द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) घाटमपुर ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।पहचान के लिए विवरण:पहनावा: मृत महिला ने लाल रंग का स्वेटर पहना हुआ है।स्थिति: महिला की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है।अपील:यदि कोई इस महिला के बारे में जानकारी रखता हो या परिजनों को जानता हो, तो कृपया तत्काल घाटमपुर पुलिस को सूचित करें अथवा सीएचसी घाटमपुर से संपर्क करें ताकि शव की पहचान हो सके और परिजनों तक सूचना पहुँच सके।

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​क्या आपने कभी किसी खाली कमरे में किसी के होने का एहसास किया है? या अचानक तापमान में गिरावट महसूस की है? इसे ही अक्सर हम 'पैरानॉर्मल एक्टिविटी' या 'अलौकिक गतिविधि' कहते हैं। यह एक ऐसा विषय है जो सदियों से जिज्ञासा और डर का कारण बना हुआ है।
​पैरानॉर्मल एक्टिविटी क्या है?
​'पैरानॉर्मल' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: 'पैरा' (Para) यानी 'परे' और 'नॉर्मल' (Normal) यानी 'सामान्य'। इसका अर्थ है ऐसी घटनाएं जो वैज्ञानिक नियमों और सामान्य मानवीय समझ से परे हैं। इसमें केवल भूत-प्रेत ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित चीजें भी शामिल हैं:
​प्रेतवाधित घटनाएं (Hauntings): किसी जगह पर आत्माओं का वास होना।
​पोल्टरगाइस्ट (Poltergeist): चीजों का अपने आप हिलना, आवाज़ें आना या भौतिक गड़बड़ी।
​टेलीपैथी (Telepathy): बिना बोले विचारों का आदान-प्रदान।
​ईवीपी (Electronic Voice Phenomena): रिकॉर्डिंग डिवाइस पर ऐसी आवाज़ें सुनाई देना जो रिकॉर्ड करते समय वहां नहीं थीं।
​पैरानॉर्मल एक्टिविटी के संकेत (Signs)
​पैरानॉर्मल इन्वेस्टिगेटर्स (जांचकर्ता) के अनुसार, कुछ खास संकेत अलौकिक उपस्थिति को दर्शाते हैं:
​तापमान में अचानक गिरावट: जिसे 'कोल्ड स्पॉट्स' (Cold Spots) कहा जाता है।
​अजीब गंध: बिना किसी स्रोत के फूलों, सल्फर या सड़ने की गंध आना।
​इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी: लाइट का अपने आप जलना-बुझना या बैटरियों का अचानक खत्म हो जाना।
​छाया दिखाई देना: आँखों के कोने से काली परछाईं (Shadow People) का दिखना।
​सच्ची घटनाओं पर आधारित उदाहरण (True Case Studies)
​दुनिया भर में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जिनका जवाब विज्ञान आज तक पूरी तरह नहीं दे पाया है। यहाँ दो सबसे प्रसिद्ध मामले दिए गए हैं:
​1. द एनफील्ड पॉल्टरगाइस्ट (The Enfield Poltergeist) - लंदन, 1977
​यह इतिहास की सबसे अच्छी तरह से डॉक्यूमेंट की गई घटनाओं में से एक है। यह घटना उत्तरी लंदन के एनफील्ड में रहने वाले हॉजसन परिवार (Hodgson Family) के साथ घटी।
​घटना: घर की 11 साल की बेटी, जैनेट, के साथ अजीब घटनाएं होने लगीं। फर्नीचर अपने आप हवा में उड़ने लगा, दीवारों से खटखटाने की आवाज़ें आने लगीं और जैनेट अक्सर हवा में तैरती (Levitate) हुई पाई गई।
​सबूत: पुलिस अधिकारियों और पत्रकारों ने अपनी आँखों से कुर्सियों को हिलते हुए देखा। बीबीसी (BBC) के रिपोर्टर्स ने भी अजीब आवाज़ें रिकॉर्ड कीं। जैनेट की आवाज़ बदलकर एक बूढ़े आदमी जैसी हो जाती थी, जो दावा करता था कि वह उस घर का पुराना मालिक 'बिल' है।
​निष्कर्ष: यह मामला इतना डरावना था कि इस पर प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्म 'The Conjuring 2' बनाई गई।
​2. भानगढ़ का किला (Bhangarh Fort) - राजस्थान, भारत
​भारत का यह किला पूरी दुनिया में 'Most Haunted Places' में गिना जाता है।
​कहानी: कहा जाता है कि एक तांत्रिक ने राजकुमारी रत्नावती को पाने के लिए काले जादू का इस्तेमाल किया था, लेकिन उसकी चाल उल्टी पड़ गई और मरते समय उसने पूरे किले को श्राप दे दिया। तब से यह माना जाता है कि यहाँ रात में जाने वाला कोई भी व्यक्ति वापस नहीं लौटता।
​वास्तविकता: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने आधिकारिक तौर पर एक बोर्ड लगा रखा है जिस पर लिखा है: "सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले किले में प्रवेश वर्जित है।" स्थानीय लोग और कई पर्यटक दावा करते हैं कि रात में यहाँ से औरतों के रोने और चूड़ियों के खनकने की आवाज़ें आती हैं।
​क्या कहता है विज्ञान? (Scientific Perspective)
​जहाँ बहुत से लोग इन बातों पर विश्वास करते हैं, वहीं विज्ञान इसके लिए तार्किक व्याख्याएं देता है:
​इन्फ्रासाउंड (Infrasound): ऐसी ध्वनि तरंगें जो हम सुन नहीं सकते लेकिन महसूस कर सकते हैं। इनसे घबराहट और 'किसी के होने' का भ्रम हो सकता है।
​कार्बन मोनोऑक्साइड: पुराने घरों में गैस लीक होने से मतिभ्रम (Hallucinations) हो सकता है, जिससे लोग 'भूत' देखने लगते हैं।
​पैरिडोलिया (Pareidolia): यह दिमाग की एक फितरत है जिसमें हम बेजान चीजों में इंसानी चेहरे या आकृतियां देखने लगते हैं (जैसे अंधेरे में लटके कपड़ों को भूत समझना)।
परिणाम -:
पैरानॉर्मल एक्टिविटी आज भी एक रहस्य है। कुछ के लिए यह अंधविश्वास है, तो कुछ के लिए एक डरावनी हकीकत। चाहे आप विज्ञान पर भरोसा करें या अलौकिक शक्तियों पर, यह विषय हमें यह सोचने पर मजबूर जरूर करता है कि "क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं?"

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असम में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों द्वारा की जा रही तथाकथित “आर्थिक घुसपैठ” पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बड़ा और सख़्त नीतिगत फैसला लिया है। राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के अंतर्गत कार्य कर रहे सभी ठेकेदारों के लिए नए श्रम नियम लागू करने की घोषणा की है, जिन्हें पूरे राज्य में सख्ती से लागू किया जाएगा।मुख्यमंत्री द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, PWD की सभी परियोजनाओं में कार्यरत श्रमिकों में कम से कम 50 प्रतिशत श्रमिक असम के स्थानीय और स्वदेशी निवासी होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, यदि शेष श्रमिकों की नियुक्ति मिया समुदाय से की जाती है, तो केवल उन्हीं लोगों को रोजगार दिया जाएगा जिनके पूर्वज वर्ष 1951 से पहले असम में बसे हुए थे। यह शर्त असम की ऐतिहासिक जनगणना और कट-ऑफ तिथि के अनुरूप रखी गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि इस फैसले का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर प्रदान करना, यह सुनिश्चित करना कि सरकारी धन का लाभ सीधे असम के स्वदेशी समुदायों तक पहुंचे, और अवैध प्रवासी श्रम शक्ति के वर्चस्व को समाप्त करना है। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक सुरक्षा सीधे तौर पर जनसांख्यिकीय सुरक्षा से जुड़ी हुई है, और सरकार किसी भी हाल में सार्वजनिक परियोजनाओं को अवैध रोजगार का माध्यम नहीं बनने देगी। सरकार के अनुसार, यह निर्देश सख्ती से लागू किया जाएगा, और नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, ठेका रद्द करने और अन्य दंडात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जाएगा, ताकि नियम केवल कागज़ों तक सीमित न रह जाएं। इस फैसले के बाद राज्यभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। जहां एक ओर सरकार इसे असम के दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न वर्गों से इस पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सरकार का कहना है कि यह नीति स्थानीय पहचान, रोजगार सुरक्षा और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक निर्णायक कदम है और भविष्य में भी असम के हितों से जुड़े ऐसे फैसले लिए जाते रहेंगे।

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సంగరెడ్డి జిల్లా జహీరాబాద్ నియోజకవర్గం మీడియా వాళ్ల మీద అక్రమ కేసులు పెట్టడం జైల్లోకి పంపించడం. ఇది సరైన పద్ధతి కాదు అని చెప్తూ మున్సిపల్ ఎన్నికల్లో నిలబడుతున్న అభ్యర్థి జిల్లా స్టాఫ్ రిపోర్టర్ మహమ్మద్ చాంద్ పాషా.20. వ వార్డ్ టీ ఆర్ ఎస్ పార్టీ నియోజకవర్గం రాజు ఎన్నికల నిలబడ్డ వ్యక్తిగా అత్యధిక మెజార్టీతో గెలిపించగలరని కోరుతున్నారు. కాంగ్రెస్ పార్టీ ఏ విధంగా సహాయ పడలేదు ప్రజలు వినేకలేదు. ప్రజలకు విరుద్ధంగా పనిచేస్తూ వ్యతిరేకంగా నిదానాన్నిధానాలు. టిఆర్ఎస్ పార్టీ నుంచి నిలబడ్డ అభ్యర్థి రాజు భారీ మెజార్టీతో గెలిపించగలరని కోరుతున్నాం. Devashish Govind TokekarVANDE Bharat live tv news NagpurEditor/Reporter/JournalistRNI:- MPBIL/25/A1465Indian Council of press,NagpurJournalist CellAll India Media AssociationNagpur District PresidentDelhi Crime PressRNI NO : DELHIN/2005/15378AD.Associate /ReporterContact no.9422428110/9146095536Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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भारत के सर्वोच्च न्यायालय में न्यायिक सुधारों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट एक एआई आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य देशभर की अदालतों में लंबित मामलों की निगरानी, प्रबंधन और त्वरित निपटान को प्रभावी बनाना है। इस अत्याधुनिक डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मामलों की स्थिति स्वतः अपडेट होती रहेगी। वादकारियों और अधिवक्ताओं को केस स्टेटस की वास्तविक समय (रियल-टाइम) जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे बार-बार अदालत या रजिस्ट्री के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी। इसके साथ ही इस प्लेटफॉर्म में डिजिटल भुगतान प्रणाली, स्वचालित रिकॉर्ड प्रबंधन और डेटा-आधारित विश्लेषण जैसी सुविधाएं भी शामिल होंगी। न्यायालय सूत्रों के अनुसार, यह एआई-संचालित प्रणाली लंबित मामलों के पैटर्न का विश्लेषण कर यह भी बताएगी कि किन अदालतों या किन प्रकार के मामलों में देरी अधिक हो रही है। इससे न्यायिक प्रशासन को नीतिगत निर्णय लेने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। इसका सीधा लाभ आम नागरिकों को मिलेगा, जिन्हें न्याय मिलने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और तेज होगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के इस कदम को न्यायिक प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल लंबित मामलों के बोझ को कम करने में सहायक होगी, बल्कि न्यायपालिका पर जनता के विश्वास को भी और मजबूत करेगी। कुल मिलाकर, यह नई डिजिटल व्यवस्था “त्वरित न्याय” के संवैधानिक लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक प्रयास है, जो भारतीय न्याय प्रणाली को आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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लेख :- मा. अजित दादा पवार यांना भावपूर्ण श्रद्धांजली 🇮🇳💐😢 सोमनाथ तडवळकर. मराठी चित्रपट अभिनेता. मला कळू आलं तेव्हा राजकारणाची मला जिज्ञासा म्हणून आवड निर्माण व्हायला लागली होती. बदल घडवण्याची, दुःख कमी करण्याची, विकास करून आयुष्य सुंदर करण्याची कला असलेलं माध्यम म्हणून मी राजकारणाकडं बघत वाचत ऐकत लहानाचा मोठं होताना, करियर म्हणून राजकारणात जावं अशा विचारापरेंत मी पोहचलो होतो. वय कमीच होत पण करियरचा निर्णय घेण्याच वय 18 झाल होत. 1995 ला करियरचा विचार करत मी कित्तेक महिने तासन तास जरीमरीच्या (कुर्ला ) डोंगरावर बसून विमानतळाकडं विमान बघत एकटाच विचार करत बसत होतो. त्या काळात मी एवढी विमान उडताना, उतरताना पाहिली होती की, विमानांच्या आवाजावरून मी विमान कोणत्या देशाच व कोणत्या एअर लाईन्सच आहे. व त्यांची उड्डाणं वेळ पाठ झाली होती. कित्तेक वेळा मी उगाचच पायलट को पायलट यांना हात दाखवून आपण ओळखीचे आहोत असं वाटायच, तो माझा विरंगुळा झाला होता. घर तिथंच होत म्हणून तेव्हा असं वाटायच. पदवीधर होऊन IAS व्हाय किंवा IPS व्हाय वाटायच पण ह्याला परिस्थी अनुरूप वाटली नाही म्हणून मीच फुली मारली. नंतर वाटल व्यवसाय करावा हॉटेल, फेक्ट्री असं काही शाळकरी वयात अनेक पडेल ती काम करत शिक्षण झालं होत म्हणून. पण त्यात जम बसायला पैसा लागतो आणी तो कमवायला आयुष्य जाईल म्हणून पुन्हा त्यावर फुली मारली. मंग वाटलं राजकारणात जावं आपल्याला त्यात गती आहे. मंग त्या विषयांचं सगळं वाचून काढलं चे गव्हेरा, मार्क्स, माओ, लेनिन, लिंकन, फुले शाहू, आंबेडकर, गांधी , नेहरू, भागतसिंग, आण्णाभाऊ, अस सगळं हदाश्या सारख वाचन केलं. दिवसभर उपाशीपोटी अख्खी मुंबई पालथी घालत फिरायचो. कसलाही कार्यक्रम कुठं आहे हे वर्तमान पत्रात आजचे कार्यक्रम सदर वाचून गर्दीत सहभागी होऊन ऐकत बघत बसायचो. धार्मचे , जातीचे कडवट विचारांचे दलित शिक्षित, अशा सगळया पक्षांचे, हौशी, गौशी नाटक, सिनेमा महोत्सव, प्रदर्शन काही सुटलं नाही माझ्या तडाख्यातून. सगळी मुंबईची कॉलेज, सभागृह. गाता येत नाही पण कोरस मध्ये हेल काढत भाग घ्यायचो. अभिनय येत नाही पण पथ नाट्यात सहभगी व्हायचो. कुठं संधी भेटली की सभा रेटून बघायचो. ओळख ना पाळख ना गुरु, ना शिष्य ! सगळं हरफन मौला चालू होत. असं करत राजकीय गोटात पोहचलो. आणि राजकीय विद्रुप चेहरे कळायला लागले. कळलं लईच डेंजर आहे हे सगळं, गुंड पुंड चोर चिटर यांच्या सोबत पण कुठून. कुठून काय येत कस होत ते बघून मला ते खूप डेंजर वाटायच. पण मला आतलं राजकारण कळायला लागलं तेव्हा कळलं डॉन,भाई , शुटर, गुंड हे रामा गडी दल्ले फ आहेत. खरे डेंजर लोक तर पांढऱ्या कपड्यात सत्ताधारी राजकीय पदावर असतात. किरकोळ लोक विरोधात संघर्ष करतात. उपोषण, आंदोलन क्रांतीची भाषा करत उपाशी पोटी सभा रेटत फिरतात. पोलिसांचा मार खातात. वकिलांकडून लुटले जातात. असो ! हे लईच बेक्कार धंदा आहे म्हणून मी त्यावर फुली मारली आणि कशाच काही माहित नसताना चित्रपटात अभिनेता आणि निर्माता व्हयाच असं स्वतःलाच निक्षुन सांगितलं आणि विमान बघत बसायच बंद झालं आणि चित्रपट सिने जगतात पाय रोवायच म्हणून हुजरेगिरी करत फिरायला लागलो. लागतील 25 वर्ष पण समाधान मिळेल जागल्याच . तशीही 25 वर्ष लागलीच बास्तान बसायला. आता सुद्धा वाटत बरे झाले आपण राजकारणात गेलो नाही . सत्तेच्या पटावर खूप डाव खेळले जातात त्यात नको असलेल्या जीवांची किंमत कुत्र्या, मांजरा सारखी असते. सगळं काही स्क्रिप्टेड असत. बर वाईट सुद्धा नियोजन बद्ध केल जात. लोक त्याला विजय, अपघात, अपघात, घात असं काहीही म्हणतात. पण सिनेमाचे लेखक चिल्लर आहेत . राजकारण्यापुढं स्क्रिट बजेट दिग्दर्शक नट नट्या खरे नाट्य चित्रपट राजकारणी बनवतात. हिरो विलन सगळं काही. आणि ते खर खर असत. सिनेमे आधारीत काल्पनिक असतात. विद्रुप चेहरे रंगवले जातात . खरे चेहरे दिसत नसतात. Devashish Govind TokekarVANDE Bharat live tv news NagpurEditor/Reporter/JournalistRNI:- MPBIL/25/A1465Indian Council of press,NagpurJournalist CellAll India Media AssociationNagpur District PresidentDelhi Crime PressRNI NO : DELHIN/2005/15378AD.Associate /ReporterContact no.9422428110/9146095536Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी छत्तीसगढ़ी बेरोजगार संघ मुख्यालय -छत्तीसगढ़ी भवन ठा.प्यारेलाल सिंह मार्ग हांडीपारा रायपुर(छ्ग)मो. 98271- 50001 यूजीसी कानून के षड्यंत्र में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी शामिल छत्तीसगढ़ के पूर्व छात्र नेताओं ने बृजमोहन अग्रवाल को राजनीति से संन्यास लेने की दी सलाह - दुबे रायपुर 31जनवरी 2026!छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण संग्राम सेनानी पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष छसपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष सर्व छत्तीसगढ़िया किसान समाज समाज संरक्षक मंडल के प्रमुख अनिल दुबे,चंद्रकांत वाजपेई, श्रीकांत सिन्हा, संजय ठाकुर ने कहा है कि बृजमोहन अग्रवाल आरक्षण मुद्दे पर प्रमुख रूप से विरोध करने वाले आज वर्ग संघर्ष करने के साथ भाजपा के षड्यंत्र के प्रमुख सूत्रधार निकले! जिस कमेटी ने यूजीसी कानून पास किया उस प्रस्ताव में बृजमोहन अग्रवाल सांसद रायपुर की भूमिका प्रमुख रही!वह भूल गए जाति वर्ग संघर्ष कराकर समाज में कोई भी ऊंचा स्थान प्राप्त नहीं कर सकता! बृजमोहन अग्रवाल पूरे देश से माफी मांगते हुए सर्वाधिक जीवन से संन्यास लेवे! श्यामूराम सेन कार्यालय सचिवमो. 90980-25545Devashish Govind TokekarVANDE Bharat live tv news NagpurEditor/Reporter/JournalistRNI:- MPBIL/25/A1465Indian Council of press,NagpurJournalist CellAll India Media AssociationNagpur District PresidentDelhi Crime PressRNI NO : DELHIN/2005/15378AD.Associate /ReporterContact no.9422428110/9146095536Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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*प्रकाशनार्थ* *राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के खिलाफ आरएसएस का दुष्प्रचार* *(आलेख : राम पुनियानी, अनुवाद : अमरीश हरदेनिया)*इस साल शहीद दिवस (30 जनवरी 2026) पर महात्मा गांधी को याद करते हुए हमें यह एहसास भी है कि गांधीजी के मूल्यों और उनकी विरासत को कमजोर करने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं। साम्प्रदायिक शक्तियों का प्रोपेगेंडा हर बीतते दिन के साथ अधिकाधिक तीखा और हमारे समाज का विभाजन और गहरा होता जा रहा है।हिन्दू-मुस्लिम एकता गांधीजी के जीवन का मूलमंत्र था। इस महामानव के इस मिशन को समकालीन राजनीति ने बहुत नुकसान पहुंचाया है। हम यह नहीं भूल सकते कि गांधीजी के सीने को तीन गोलियों से छलनी करने वाला व्यक्ति हिन्दू राष्ट्रवाद (हिन्दुत्व) की विचारधारा का कट्टर समर्थक था। यह विचारधारा राष्ट्रीय आंदोलन की विचारधारा के एकदम विपरीत थी।राष्ट्रीय आंदोलन स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों से ओतप्रोत था। मुस्लिम राष्ट्र की मांग करने वाली साम्प्रदायिक शक्तियां तो पाकिस्तान के निर्माण के बाद क्षीण हो गईं, लेकिन हिन्दू साम्प्रदायिक शक्तियों ने धीरे-धीरे स्वयं को मजबूत बनाना शुरू किया। जयप्रकाश नारायण (जेपी) के आंदोलन से जुड़ने के पहले तक इन शक्तियों को समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था। इस आंदोलन का हिस्सा बनने के बाद सामाजिक-राजनैतिक परिदृश्य पर वे अधिक सशक्त होकर उभरीं।चूंकि गांधीजी की सारे विश्व में उजली और बेदाग छवि थी, इसलिए भाजपा-आरएसएस तक को उनके प्रति सम्मान भाव प्रदर्शित करना पड़ा। लेकिन यह मात्र दिखावा था।शाखाओं और उनके अन्य मंचों के जरिए वे हिंदू समुदाय को असहाय बनाने, हिंदुओं के हितों की बलि चढ़ाकर मुसलमानों को बढ़ावा देने, भगत सिंह की जान न बचाने, महान स्वतंत्रता सेनानी सुभाषचन्द्र बोस को नजरअंदाज करने और अपेक्षाकृत अधिक सक्षम सरदार पटेल की बजाए नेहरू को अपना उत्तराधिकारी नामांकित कर प्रधानमंत्री बनाने आदि के लिए गांधीजी को दोषी ठहराते रहे।शुरूआत में मुंह जुबानी प्रोपेगेंडा और बाद में अन्य माध्यमों के जरिए वे समाज में गांधीजी के बारे में गलत धारणाएं कायम करने और साथ ही उनके हत्यारे नाथूराम गोडसे का महिमामंडन करने में कामयाब रहे हैं। यहां तक कि गांधीजी की हत्या के दृश्य के सार्वजनिक प्रदर्शन तक आयोजित हुए हैं। इससे यह साफ है कि उनके प्रति किस हद तक नफरत पैदा कर दी गई है। गांधीजी को नीचा दिखाने और गोडसे का यशोगान करने वाले नाटक और फिल्में बड़े पैमाने पर बनाई और प्रदर्शित की जा रही हैं।गांधीजी के खिलाफ किए जा रहे अधिकांश दुष्प्रचार के पीछे हिंदुत्व शक्तियां हैं। ऐसा वे अपने को मज़बूत करने और स्वाधीनता संग्राम के उन मूल्यों का विरोध करने के लिए कर रही हैं, जो भारतीय संविधान में भी प्रतिबिंबित होते हैं। तुर्की में खिलाफत की पुनर्स्थापना के लिए सन् 1919 में शुरू हुआ मुसलमानों का विश्वव्यापी आंदोलन, भारतीय मुसलमानों को औपनिवेशिक सरकार के विरोध में चलाए जा रहे संघर्ष से जोड़ने का एक अच्छा अवसर था। गांधीजी ने इस मौके का फायदा उठाया, जिससे स्वाधीनता संग्राम को व्यापक स्वरूप प्रदान करने का लक्ष्य काफी हद तक हासिल हुआ। इसके समानांतर चलाया गया असहयोग आंदोलन अंग्रेजों के खिलाफ पहला ऐसा संघर्ष था, जिसमें सामान्य जनता की बड़े पैमाने पर भागीदारी थी। इसके पहले बंगभंग के खिलाफ व्यापक जनांदोलन हो चुका था। असहयोग आंदोलन ने जबरदस्त जोर पकड़ लिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश चौरी-चौरा कांड के कारण उसे स्थगित करना पड़ा।दांडी यात्रा या नमक सत्याग्रह 12 मार्च 1930 को प्रारंभ हुआ और उसके साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत हुई। जहां दांडी यात्रा उसी वर्ष अप्रैल माह में समाप्त हो गई, वहीं सविनय अवज्ञा आंदोलन 1934 तक जारी रहा। इस बीच भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू मौत की सजा का सामना कर रहे थे। यह झूठ फैलाया जाता है कि गांधीजी चाहते, तो इनकी फांसी रूकवा सकते थे।सच यह है कि जो ये झूठ फैलाते हैं, उन्होंने उस समय इन क्रांतिकारियों के समर्थन में एक शब्द तक नहीं कहा था। गांधीजी ने उन्हें मृत्युदंड न देने का अनुरोध करते हुए वायसराय लार्ड इरविन को दो बार पत्र लिखा। उन्होंने इरविन से मुलाकात के दौरान भी इस मुद्दे पर चर्चा की। इरविन ने इस अपील पर विचार किया, किंतु ब्रिटिश सरकार ने इसे खारिज कर दिया, क्योंकि पंजाब में तैनात ब्रिटिश अधिकारियों ने क्रांतिकारियों की मौत की सजा रद्द या स्थगित किए जाने पर इस्तीफा देने की धमकी दी थी। प्रसिद्ध इतिहासकार व्ही. एन. दत्ता भी गांधी-इरविन के बीच हुए पत्र व्यवहार और समकालीन साक्ष्यों के आधार पर इसी निष्कर्ष पर पहुंचे कि “गांधी, भगत सिंह का जीवन बचाने के अत्यंत इच्छुक थे और इसलिए लार्ड इरविन से भगत सिंह को फांसी न दिए जाने की अपील कर रहे थे।”दत्ता के अनुसार गांधीजी की भूमिका समझने के लिए हमें ‘‘वायसराय से उनकी चर्चाओं को उस समय के राजनैतिक माहौल, जनमत के दबाव, वायसराय की भूमिका और ब्रिटिश नौकरशाही की कार्यप्रणाली और भारत व ब्रिटेन में साम्राज्यवादी तंत्र के संदर्भ में देखना होगा।”दूसरा बड़ा झूठ जिसे बड़े पैमाने पर फैलाया जाता है, वह यह है कि गांधीजी ने नेताजी सुभाषचन्द्र बोस और उनके योगदान को नजरअंदाज किया। सच यह है कि नेताजी ने ब्रिटिश-विरोधी संघर्ष के तौर-तरीकों पर मतभेद के चलते पूरी गरिमा और सम्मान के साथ कांग्रेस को छोड़ा था। जहां कांग्रेस के अधिकांश नेता ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध आन्दोलन करने के पक्ष में थे, वहीं नेताजी चाहते थे कि ब्रिटेन से लोहा लेने के लिए धुरी ताकतों (जापान और जर्मनी) से मदद ली जाए।उस समय हिंदुत्ववादी शक्तियां ज्यादा से ज्यादा भारतीयों को ब्रिटिश फ़ौज में भरती करने के अभियान में जुटी हुई थीं। इसी ब्रिटिश फ़ौज ने नेताजी की आजाद हिन्द फ़ौज के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।परस्पर मतभेद के बाद भी नेताजी और गांधीजी एक-दूसरे का बहुत सम्मान करते थे। जहां सुभाषचन्द्र बोस गांधीजी को राष्ट्रपिता कहते थे, वहीं गांधीजी बोस को ‘देशभक्तों का राजा’ बताते थे। एक बैठक में गांधीजी ने सुभाषचन्द्र बोस से कहा था कि वे उस रास्ते पर चलने के घोर विरोधी हैं, जिसकी वकालत नेताजी कर रहे हैं। मगर अगर उस रास्ते पर चलकर भारत को आज़ादी हासिल होती है, तो वे उन्हें बधाई देने वाले पहले व्यक्ति होंगे।नेताजी ने आजाद हिंदी फ़ौज की पहली बटालियन का नाम गांधीजी के नाम पर रखा था। कांग्रेस ने आजाद हिन्द फ़ौज के कैदियों की पैरवी के लिए एक समिति बनाई थी, जिसके प्रमुख सदस्यों में भूलाभाई देसाई, कैलाशनाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरु शामिल थे। इस समिति ने आजाद हिंदी फ़ौज के कैदियों की कानूनी लड़ाई लड़ी।जहां तक गांधीजी के उत्तराधिकारी और भारत के भावी प्रधामंत्री का सवाल है, महात्मा गांधी ने 1940 के दशक की शुरुआत में ही यह साफ़ कर दिया कि उनके उत्तराधिकारी न तो राजाजी होंगे और न पटेल। वे नेहरु होंगे। व्यावहारिक दृष्टि से 1937 और 1946 के चुनावों में कांग्रेस का नेतृत्व नेहरु ने ही किया था। सरदार पटेल ने कहा था कि इन दोनों चुनावों में कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करते के लिए नेहरु ने अकल्पनीय मेहनत की है।सन 1946 में मौलाना आजाद का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जब कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुना जाना था, तब महात्मा गांधी ने पटेल से दौड़ से हट जाने को कहा था। गांधीजी के अनुयायी और नेहरु के पुराने साथी बतौर, पटेल को इस सब से कोई शिकायत नहीं थी और वे जीवन भर नेहरु के साथ मिलकर काम करते रहे। दोनों के बीच मतभेद होते थे, मगर उन्हें व्यक्तिगत मुलाकातों या कैबिनेट की बैठकों में सुलझा लिया जाता था। पटेल ने कहा था कि नेहरु उनके छोटे भाई और नेता हैं।गांधीजी का देश की नब्ज पर हाथ था। उन्हें पता था कि उनके बाद, देश के सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता नेहरु ही हैं। गांधीजी यह भी जानते थे कि नेहरु को देश के युवा बहुत पसंद करते हैं।गांधीजी बीसवीं सदी के भारत के महानतम नेता थे। वे भारत को बहुत अच्छी तरह से समझते थे। आज सांप्रदायिक ताकतें हमारे देश की हर असफलता, हर कमी के लिए नेहरु को दोषी ठहरा रही हैं। गांधीजी पर भी अप्रत्यक्ष ढंग से हमले किए जा रहे हैं।*(लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सेंटर फॉर स्टडी ऑफ़ सोसाइटी एंड सेकुलरिज्म के अध्यक्ष हैं।)*Devashish Govind TokekarVANDE Bharat live tv news NagpurEditor/Reporter/JournalistRNI:- MPBIL/25/A1465Indian Council of press,NagpurJournalist CellAll India Media AssociationNagpur District PresidentDelhi Crime PressRNI NO : DELHIN/2005/15378AD.Associate /ReporterContact no.9422428110/9146095536Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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कुस्ती खेळाडूंनी आपल्या गावाचे नाव लौकिक करावे - माजी सभापती प्रेम वनवे राजेदहेगाव येथे भव्य आमदंगल यशस्वीविलास केजरकर भंडारा.भंडारा:- विदर्भ हा कुस्ती पटूंचा क्षेत्र आहे. मात्र पुर्वी सारखे कुस्ती स्पर्धक राहिले नाही. आता कुस्ती ही कोल्हापूर, पुणे या भागात मोठ्या प्रमाणात खेळशी जाते. त्या भागात अनेक कुस्ती खेळाडू तयार झालेले आहेत. त्याच धर्तीवर भंडारा तालुक्यातील अनेक ग्रामीण भागातील कुस्ती खेळाडूंनी कसुन मेहनत घ्यावी. जेणेकरून परत कुस्ती स्पर्धक मोठ्या प्रमाणात पहायला मिळण्यासाठी प्रयत्न करावे. त्याकरिता कुस्ती खेळाडूंनी आपल्या गावाचे नाव लौकिक करावे असे प्रतिपादन जिल्हा परिषदेचे माजी बांधकाम सभापती तथा जिल्हा परिषद सदस्य प्रेम वनवे यांनी केले. ते सार्वजनिक मंडई उत्सव समिती राजेदहेगाव ( जवाहरनगर) यांच्या वतीने मंडई व औलांपिक वीर स्व. खाशाबा जाधव यांच्या जयंती, राज्य क्रीडा दिनानिमित्त भव्य आमदंगल पाण्याच्या टाकीजवळ राजेदहेगाव येथे उद्घाटन करतांना बोलत होते. आमदंगल कार्यक्रमाचे उद्घाटन जिल्हा परिषदेचे माजी बांधकाम सभापती तथा जिल्हा परिषद सदस्य प्रेम वनवे यांच्या हस्ते करण्यात आले. अध्यक्षस्थानी महाराष्ट्र राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार प्राप्त रामप्रसाद मस्के होते. प्रमुख पाहुणे म्हणून उपसरपंच अश्विन थोटे, माजी सरपंच भिमेश ढोबळे, रामचंद्र लेंडे, सामाजिक कार्यकर्ते निरंजन मुस्कारे, ग्राम पंचायत सदस्य मंगेश मडावी, श्रीधर थोटे, शशीभाऊ भोंगाडे, राजू सेलोकर इत्यादी मान्यवर उपस्थित होते. उपस्थित मान्यवरांच्या हस्ते विर हनुमानाच्या ( बजरंगी) फोटो चे पुजन व मार्ल्यापण करून तसेच फित कापून आमदंगल कार्यक्रमाचे उद्घाटन करण्यात आले. उपस्थित मान्यवरांचा शाल, श्रीफळ व पुष्पगुच्छ देऊन सत्कार करण्यात आला. तसेच औलांपिक वीर स्व. खाशाबा जाधव यांच्या यांच्या जयंती निमित्त राज्य क्रीडा दिन व आमदंगल विषयी विविध मार्मिक उदाहरण देऊन मार्गदर्शन करण्यात आले. कुस्ती स्पर्धेकरिता भंडारा, मौदा, परसोडी, मंडणगाव, खमारी, दहेगाव, मध्यप्रदेश छिंदवाडा, कोथुर्णा, वडेगाव व अन्य ठिकाणांहून जवळपास ४५ ते ६० महिला - पुरूष कुस्ती खेळाडुंनी सहभाग घेतला होता.त्यावेळी विलास केजरकर, भगवान वंजारी, सखाराम शेंडे, रामा थोटे, श्रावण शेंडे यांनी कुस्ती पंचांची योग्य भुमिका पार पाडली. कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन शामपाल लोहबरे व प्रास्ताविक उपसरपंच अश्विन थोटे यांनी केले तर उपस्थितांचे आभार सुनिल माकडे यांनी मानले. कार्यक्रमाच्या यशस्वीतेसाठी विनोद ढोबळे, राजकुमार लेंडे, रत्नदीप हुमने, जयदेव उके, दीलीप वैद्य, जयदेव बारई, पतिराम ढोबळे सह सार्वजनिक मंडई उत्सव समिती पदाधिकारी व कार्यकर्ते तसेच ग्रामवासी राजेदहेगाव ( जवाहरनगर) इत्यादींनी सहकार्य केले.Devashish Govind TokekarVANDE Bharat live tv news NagpurEditor/Reporter/JournalistRNI:- MPBIL/25/A1465Indian Council of press,NagpurJournalist CellAll India Media AssociationNagpur District PresidentDelhi Crime PressRNI NO : DELHIN/2005/15378AD.Associate /ReporterContact no.9422428110/9146095536Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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राजमाता जिजाऊ, फातिमा शेखसह सावित्रीबाई फुले यांचे आदर्श जोपासावे‌- सरपंचा सौ. स्वातीताई हुमने राजेदहेगाव येथे अनेकांचा सत्कार विलास केजरकर भंडारा.भंडारा:- राजमाता जिजाऊ आणि फातिमा शेख यांचा इतिहास अभ्यासतांना आपल्याला क्रांतीज्योती सावित्रीमाईंचे कार्य अभ्यासावे लागते. फुले दाम्पत्यांना जेव्हा त्यांचे वडील गोविंदराव घराबाहेर काढतात व जागेच्या शोधात भटकट असतांना त्यांना उस्मानभाई शेख यांनी आपल्या ओसरीत आसरा दिला. इथेच त्यांची बहीण फातिमा शेख यांची ओळख होते. नंतर हीच फातिमा सावित्रीबाईंच्या सोबतीने शिक्षण ग्रहण करते. नॉर्मल स्कूल मधून ट्रेनिंग घेतलेली पहिली शिक्षिका म्हणून अध्यापनाचे कार्य करते. सावित्रीबाईंची सखी- मैत्रीण म्हणून तिच्या सर्व सामाजिक आणि कौटुंबिक मदतीला धावून येणारी फातिमा ही खरोखरच समाजाच्या रोशाला भीक न घालता सावित्री जोतिबा यांच्या कार्याला संपूर्णपणे आपले जीवन समर्पित करते. आज फातिमा शेख यांची ओळख आपल्याला होत असली तरी त्या काळात मुस्लिम आणि हिंदू या दोन्ही समाजाचा रोष त्यांना पत्करावा लागला होता. तरीही न डगमगता फातीमाने सावित्रीची साथ शेवटपर्यंत सोडली नाही. स्वराज्य संकल्पित राजमाता माँ जिजाऊ यांना रयतेचे राज्य निर्माण करावयाचे होते. त्यासाठी त्यांनी जीवाची पर्वा न करणारा शिवाजी घडविला. आणि बाळ शिवाजीचा छत्रपती राजे शिवाजी पर्यंतचा प्रवास स्वतःच्या मार्गदर्शनात घडवून आणला. म्हणून राजमाता जिजाऊ, फातिमा शेखसह सावित्रीबाई फुले यांचे आदर्श जोपासावे‌ असे प्रतिपादन राजेदहेगाव येथील सरपंचा सौ. स्वातीताई रत्नदीप हुमने यांनी केले. त्या संयुक्त जयंती सोहळा समिती, महिला मंडळ व ग्राम पंचायत, समस्त ग्रामवासी राजेदहेगाव यांच्या संयुक्त विद्यमानाने क्रांतीज्योती सावित्रीबाई फुले, राजमाता जिजाऊ व स्वामी विवेकानंद यांची संयुक्त जयंती महोत्सव ग्राम पंचायत कार्यालय राजेदहेगाव येथील भव्य पटांगणावर आयोजित कार्यक्रमात मार्गदर्शन करतांना बोलत होत्या. कार्यक्रमाच्या अध्यक्षस्थानी ग्राम पंचायत राजेदहेगाव येथील सरपंचा सौ. स्वातीताई रत्नदिप हुमने होत्या. प्रमुख अतिथी म्हणून महिला व बाल सहाय्यक कक्षाच्या समुपदेशक सुषमा बन्सोड, महाराष्ट्र राज्य आदर्श शिक्षक पुरस्कार प्राप्त रामप्रसाद मस्के, भारतीय आट्यापाटया संघ दिल्लीच्या कर्णधार तथा सुवर्णपदक विजेती कु. प्राची दुर्गा केशव चटप, जिल्हा परिषद उच्च प्राथमिक शाळा राजेदहेगाव येथील सेवानिवृत्त मुख्याध्यापिका सौ. आमना खान, उपसरपंच अश्विन थोटे, दुर्गा चटप, तंटामुक्त समिती अध्यक्ष राजेश ढोबळे, महिला बचत गट प्रमुख लताताई ढोबळे, प्रतिभाआई मुनिंद्र हुमने, ग्राम पंचायत सदस्य प्रगती वैद्य, सविता चन्ने, अश्विन हुमने, निशाताई उके, प्रज्ञाताई ढोबळे, मंदाताई बावने, मंगेश मडावी इत्यादी मान्यवर उपस्थित होते. उपस्थित मान्यवरांच्या हस्ते स्वराज्य संकल्पित राजमाता जिजाऊ, क्रांतीज्योती सावित्रीमाई फुले, अल्पसंख्याक समाजातील पहिली मुस्लिम स्त्रीशिक्षिका फातिमा शेख, डॉ. बाबासाहेबांचे आधारवड रमाबाई आंबेडकर या महानायकांच्या प्रतिमेला माल्यार्पण करून कार्यक्रमाचा शुभारंभ झाला. सावित्रीबाई फुले, स्वामी विवेकानंद, माजिजाऊ यांच्या प्रतिमेचे पूजन, मार्ल्यापण व दीप प्रज्वलन करून उद्घाटन करण्यात आले. त्याप्रसंगी गौरव जिजाऊ व सावित्रीच्या लेक भारतीय आट्यापाटया संघ दिल्लीच्या कर्णधार तथा सुवर्ण पदक विजेती कु. प्राची चटप हिच्या सह विविध क्षेत्रात उंच भरारी घेऊन नोकरीवर लागलेल्या युवक - युवतींचा आई - वडीलांसह शाल, श्रीफळ, स्मृतिचिन्ह व रोपटे देऊन सत्कार करण्यात आले. त्यावेळी महिलांनी आकर्षक लेझीम सादर केले. गावातील महिला, विद्यार्थिनींनी विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम व युवक बिरादरी शाखा भंडारा च्या चमुनी जनजागृतीवर सांस्कृतिक कार्यक्रम सादर केले तसेच उत्कर्ष लेंडे, अनुश्री वासनिक, अनिषा ढोबळे, इतिका साखरवाडे यांनी स्त्रीशक्ती विषयी पोवाडा सादर करून रसिकांची मने जिंकली. आणि सावित्रीबाई फुले यांच्या जीवन चरित्रावर प्रकाश टाकतांना त्यांच्या आयुष्यातील अनेक घटकांचा प्रेरणादायी प्रवास मांडला. स्त्रीशक्ती विषयी पोवाडा सादर करून रसिकांची मने जिंकली. उपस्थित मान्यवरांनी विविध मार्मिक उदाहरण देऊन स्वामी विवेकानंद, सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख, माॅ जिजाऊ यांच्या कार्याविषयी विविध मार्मिक उदाहरण देऊन मार्गदर्शन केले. परिसरातील विद्यार्थी- विद्यार्थिनींनी शिक्षक-शिक्षिका, युवक-युवती व गावकरी महिला -पुरूष मोठ्या संख्येनी उपस्थित होते. कार्यक्रमाचे सूत्रसंचालन प्रज्ञा हुमणे व प्रास्ताविक रंजना लेंडे यांनी केले. तर उपस्थितांचे आभार नूतन ईटनकर यांनी मानले. कार्यक्रमाच्या यशस्वीतेसाठी संयुक्त जयंती सोहळा समिती, महिला मंडळ राजेदहेगाव येथील पदाधिकारी व कार्यकर्त्यांनी सहकार्य केले.Devashish Govind TokekarVANDE Bharat live tv news NagpurEditor/Reporter/JournalistRNI:- MPBIL/25/A1465Indian Council of press,NagpurJournalist CellAll India Media AssociationNagpur District PresidentDelhi Crime PressRNI NO : DELHIN/2005/15378AD.Associate /ReporterContact no.9422428110/9146095536Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

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My Law Suvidha ने “Tax Sakhi Initiative” की शुरुआत की**

पटना | जनवरी 2026

महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में My Law Suvidha ने एक नई और महत्वपूर्ण पहल “Tax Sakhi Initiative” की शुरुआत की है। यह पहल महिलाओं को कानूनी एवं कर (Tax) सेवाओं से जुड़ी लीड जनरेशन और क्लाइंट कोऑर्डिनेशन के माध्यम से आय का अवसर प्रदान करती है।

यह initiative विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए डिज़ाइन की गई है जो घर से या लचीले समय में कार्य करना चाहती हैं। इस मॉडल में महिलाओं की भूमिका केवल ग्राहक से संपर्क, जानकारी साझा करना और दस्तावेज़ समन्वय तक सीमित है, जबकि सभी कर एवं कानूनी कार्य My Law Suvidha की प्रोफेशनल टीम द्वारा किए जाते हैं।

Tax Sakhi Initiative की विशेषताएँ

इस पहल के अंतर्गत न्यूनतम 12वीं पास महिलाएँ जुड़ सकती हैं। चयनित महिलाओं को निम्न कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है:

संभावित ग्राहकों से संपर्क

सेवा आवश्यकताओं की जानकारी एकत्र करना

क्लाइंट और My Law Suvidha टीम के बीच समन्वय


यह initiative GST सेवाएँ, आयकर रिटर्न (ITR), MSME रजिस्ट्रेशन, PAN सेवाएँ, कंपनी रजिस्ट्रेशन, कंपनी कंप्लायंस, NGO / सोसायटी रजिस्ट्रेशन एवं कंप्लायंस जैसी सेवाओं को कवर करती है।

कमीशन आधारित और लचीला मॉडल

Tax Sakhi Initiative पूरी तरह कमीशन आधारित मॉडल पर कार्य करती है, जिसमें:

कोई निश्चित कार्य समय नहीं

मासिक कमीशन भुगतान

घर से कार्य करने की सुविधा


इस मॉडल से महिलाएँ अपने पारिवारिक दायित्वों के साथ‑साथ सम्मानजनक आय अर्जित कर सकती हैं।

My Law Suvidha के एक प्रतिनिधि ने बताया:

> “Tax Sakhi Initiative का उद्देश्य महिलाओं को प्रोफेशनल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें नागरिकों और कानूनी सेवाओं के बीच एक भरोसेमंद सेतु बनाना है। यह पहल जागरूकता, गरिमा और आर्थिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देती है।”



जागरूकता और अनुपालन पर ज़ोर

यह पहल केवल आय तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य कानूनी एवं कर जागरूकता को बढ़ाना भी है, ताकि छोटे व्यवसाय, स्टार्ट‑अप, NGOs और आम नागरिक सही और सुरक्षित तरीके से कंप्लायंस सेवाओं का लाभ उठा सकें।

पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरुआत

वर्तमान में यह initiative 20 महिलाओं के पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। सकारात्मक प्रतिक्रिया और प्रदर्शन के आधार पर इसे भविष्य में जिला एवं राज्य स्तर तक विस्तार देने की योजना है।

Tax Sakhi Initiative के माध्यम से My Law Suvidha ने समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण और जिम्मेदार कानूनी जागरूकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।

मीडिया संपर्क:
📌 My Law Suvidha – Tax Sakhi Initiative
📞 संपर्क नंबर: 9334055408

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Lohai Malhar, Kathua:
In an important administrative development, Inspector Shakeel Ahmed has been transferred from his post as In-Charge Anti-Drug Unit (IC/ADU) and posted as the Station House Officer (SHO) Malhar, as part of a routine reshuffle within the police department aimed at strengthening grassroots-level policing and improving law and order.
According to official sources, the transfer has been effected in the interest of public service and better administrative functioning. Inspector Shakeel Ahmed is known for his professional conduct and has played a significant role during his tenure with the Anti-Drug Unit, where he actively worked against drug trafficking and substance abuse, contributing to several awareness drives and enforcement actions.
With his new posting as SHO Malhar, expectations are high among local residents for improved policing, prompt redressal of public grievances, and enhanced focus on crime prevention. Malhar, being a sensitive and geographically challenging area of Kathua district, requires proactive policing and strong coordination with the local community—an area where Inspector Ahmed is believed to bring valuable experience.
Speaking informally, local citizens expressed hope that the new SHO will prioritize issues such as drug abuse, petty crimes, traffic regulation, and public safety, while maintaining a people-friendly approach. Community leaders have also welcomed the transfer, stating that effective leadership at the police station level is crucial for maintaining peace and trust between the police and the public.
Meanwhile, Inspector Shakeel Ahmed is expected to assume charge shortly. The outgoing SHO was appreciated by officials for his services during his tenure in Malhar.
Police officials reiterated that such transfers are a regular part of departmental policy and are intended to bring fresh perspectives and renewed energy to field postings.

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My Law Suvidha Launches “Tax Sakhi Initiative”**

Patna | January 2026

In a significant step towards women empowerment and flexible employment, My Law Suvidha has launched a new women‑centric initiative titled “Tax Sakhi Initiative”, aimed at creating income opportunities for women through legal and tax service awareness.

The initiative is designed to provide work‑from‑home and flexible earning opportunities for women by engaging them in lead generation and client coordination roles related to taxation and compliance services. The actual legal and tax work is handled entirely by the professional team of My Law Suvidha, ensuring accuracy, compliance, and ethical standards.

About the Initiative

Under the Tax Sakhi Initiative, selected women—minimum 12th pass—are trained to:

Generate client leads

Coordinate with clients for document collection

Facilitate communication between clients and the My Law Suvidha team


The initiative covers services such as GST services, Income Tax Returns (ITR), MSME registration, PAN services, company incorporation, company compliance, NGO and society registration, and ongoing compliance support.

Commission‑Based, Flexible Model

The program follows a commission‑based earning model with monthly payouts, no fixed working hours, and no mandatory office presence. This structure allows women to balance family responsibilities while building a sustainable income source.

A spokesperson from My Law Suvidha stated:

> “The Tax Sakhi Initiative is not about replacing professionals, but about empowering women to become a bridge between citizens and compliant legal services. Our goal is awareness, dignity of work, and financial independence.”



Focus on Awareness & Compliance

The initiative also emphasizes legal and tax awareness, helping small businesses, startups, NGOs, and individuals understand compliance requirements in a simplified manner. All services are delivered under professional supervision to maintain transparency and trust.

Limited Pilot Phase

Currently launched as a pilot project with 20 women, the initiative plans to expand at district and state levels based on performance and response.

With this initiative, My Law Suvidha strengthens its commitment to inclusive growth, women empowerment, and responsible legal awareness, aligning professional services with social impact.


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For Media Queries:
📌 My Law Suvidha – Tax Sakhi Initiative
📞 Contact: 9334055408

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मार्च से शुरू होगा निःशुल्क शक्ति बैच
शहर।
द एस के एकेडमी द्वारा विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी शक्ति बैच के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। यह बैच पूर्ण रूप से निःशुल्क है, जिसमें विद्यार्थियों से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
एकेडमी प्रबंधन के अनुसार शक्ति बैच मुख्य रूप से देश की सेवा करने वाले, हमें सुरक्षित रखने वाले देश के वीरों को समर्पित है। इस बैच के अंतर्गत सभी सुरक्षा बलों—जैसे सेना, पुलिस, अर्धसैनिक बल एवं अन्य सुरक्षा सेवाओं में कार्यरत कर्मियों के बच्चों को पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है।
शक्ति बैच का संचालन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जाएगा, जिससे अधिक से अधिक विद्यार्थी लाभान्वित हो सकें। एकेडमी का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को एक मजबूत भविष्य की दिशा देना है।
रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है तथा बैच की कक्षाएं मार्च माह से शुरू की जाएंगी।

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“सोशल मीडिया आज की शक्ति है, इसका सकारात्मक उपयोग रचनात्मक बदलाव लाता है” — मो. इसरारबरही। सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग किस तरह जीवन रक्षक साबित हो सकता है, इसका सशक्त उदाहरण मुस्लिम अवामी तंजीम ट्रस्ट की पहल से सामने आया है। कोनरा निवासी शमशाद आलम की 24 वर्षीय पुत्री तमन्ना 21 जनवरी से घर से लापता थी। पिता की डांट से नाराज़ होकर निकली तमन्ना को लेकर परिजनों ने स्थानीय थाना में सनहा दर्ज कराई थी और कोडरमा रेलवे स्टेशन व दिल्ली रेलवे जंक्शन के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिसमें वह अंतिम बार दिल्ली जंक्शन पर पूर्वा एक्सप्रेस के प्लेटफॉर्म नंबर 12 पर कैमरा नंबर 85 में दिखाई दी।स्थानीय थाना, आरपीएफ और जनप्रतिनिधियों को सूचना देने के बावजूद कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी। शुक्रवार को मामला मुस्लिम अवामी तंजीम ट्रस्ट के सचिव मो. इसरार के संज्ञान में आया, जिन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से रेल मंत्रालय से मदद की अपील की। मंत्रालय ने त्वरित संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया और ट्रस्ट से समन्वय बनाए रखने को कहा।लगभग छह घंटे के प्रयास के बाद तमन्ना तेलंगाना के सिकंदराबाद स्टेशन पर सुरक्षित मिली, जहां आरपीएफ ने उसे संरक्षण में लेकर ट्रस्ट को सूचना दी। बाद में स्थानीय थाना को जानकारी दी गई और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद तमन्ना को परिजनों को सौंपा जाएगा। इस सफल पहल के लिए ट्रस्ट के सचिव ने स्थानीय पुनि सह थाना प्रभारी विनोद कुमार के सहयोग के प्रति आभार जताया और युवाओं से अपील की कि सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों के लिए करें, ताकि समाज में रचनात्मक बदलाव लाया जा सके।

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ओबीसी आरक्षण प्रकरण में मध्यप्रदेश सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में प्रभावी रूप से पक्ष रखा
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प्रिंट एवं सोशल मीडिया में प्रकाशित कुछ तथ्यहीन एवं भ्रामक रिपोर्टिंग को न्यायालय ने गंभीरता से संज्ञान में लिया
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ओबीसी आरक्षण से संबंधित प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय में राज्य सरकार द्वारा पूरी तैयारी के साथ सशक्त पक्ष रखा जा रहा है। इसी क्रम में 29 जनवरी 2026 को राज्य सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल श्री के.एम. नटराज, स्टैंडिंग कॉउंसल श्री मृगांक एलकर, अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री धीरेंद्र सिंह परमार, स्टैंडिंग कॉउंसल श्री हरमीत सिंह रूपराह एवं शासकीय अधिवक्ता श्री राजन चौरसिया सम्पूर्ण तैयारी के साथ न्यायालय में उपस्थित रहे।

माननीय सर्वोच्च न्यायालय की बेंच केवल इस सप्ताह के लिए गठित थी। न्यायालय द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त प्रकरण की विस्तृत सुनवाई 4 फरवरी 2026 को की जाएगी। राज्य सरकार की ओर से न ही समय मांगा गया और न ही सुनवाई को आगे बढ़ाने का कोई अनुरोध किया गया।

न्यायालय के संज्ञान में लाई गई तथ्यहीन एवं भ्रामक रिपोर्टिंग

शुक्रवार 30 जनवरी को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल श्री के.एम. नटराज द्वारा दिनांक 29 जनवरी को न्यायालय में हुई सुनवाई के संबंध में प्रिंट एवं सोशल मीडिया में की गई तथ्यहीन एवं भ्रामक रिपोर्टिंग के संवेदनशील मुद्दे को माननीय न्यायालय के संज्ञान में लाया गया। उन्होंने कहा कि माननीय न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरणों के संबंध में मीडिया के समक्ष पार्टी प्रवक्ताओं की तरह जानकारी प्रस्तुत करना न्यायालय की गरिमा के विरूद्ध है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल श्री नटराज ने मीडिया के समक्ष संबंधित एडवोकेट द्वारा शासकीय अधिवक्ताओं की अनुपस्थिति बताने और माननीय न्यायाधिपतियों के नाम के उल्लेख को भी न्यायालयीन गरिमा के विरूद्ध बताने पर समग्र निर्देश प्रसारित करने का आग्रह किया। इसे न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए आगामी 4 फरवरी 2026 को होने वाली सुनवाई के दौरान इस विषय को संज्ञान लेने की बात कही है।

Dainik Bhaskar
#JansamparkMP

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फर्रुखाबाद।सीपी इंटरनेशनल स्कूल में स्काउट गाइड की लघु शाखा ‘कब’ एवं ‘बुलबुल’ का त्रिदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह प्रशिक्षण 28 जनवरी 2026 से 30 जनवरी 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें छात्राओं को अनुशासन, सेवा, रचनात्मकता एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण गुर सिखाए गए।प्रशिक्षण का संचालन जिला गाइड कमिश्नर श्री चमन शुक्ला द्वारा किया गया। इस दौरान छात्राओं को पर्यावरण सुरक्षा, शारीरिक व्यायाम, गीत-संगीत, झंडा गीत, प्रार्थना, नियम एवं प्रतिज्ञा के साथ-साथ अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी वस्तुएँ बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इन गतिविधियों ने छात्राओं में आत्मनिर्भरता, सहयोग की भावना और रचनात्मक सोच को मजबूत किया।कार्यक्रम के अवसर पर विद्यालय के निदेशक डॉ. मिथिलेश अग्रवाल ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उपनिदेशक श्रीमती अंजू राजे ने कब-बुलबुल गतिविधियों को जीवन कौशल से जोड़ने वाला बताया।मैनेजिंग डायरेक्टर श्रीमती ज्योत्सना अग्रवाल ने छात्राओं के उत्साह की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की आवश्यकता पर बल दिया।विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री संजय बिष्ट ने इसे अनुशासन एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करने वाला कार्यक्रम बताया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में गाइड कैप्टन काजल अग्रवाल एवं श्रीमती मीनल गौड़ का विशेष सहयोग रहा।समापन अवसर पर प्राइमरी विंग इंचार्ज शिवानी दीक्षित ने आभार व्यक्त किया।प्रशिक्षण के अंत में छात्राओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और सभी ने सीखे गए अनुभवों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

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बोले—भाजपा चाहती है गरीब पीतल के जेवर पहनें, भाजपाई सोना खरीद रहे, इसलिए बढ़ रहे दामकन्नौज। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सोमवार को कन्नौज पहुँचे। यहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से मुलाकात की और मीडिया से बातचीत के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला।अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा सरकार में महंगाई चरम पर है। सोने के बढ़ते दामों को लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि “भाजपा चाहती है कि गरीब लोग पीतल के जेवर पहनें, जबकि भाजपाई खुद सोना खरीद रहे हैं। यही वजह है कि सोने के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।”उन्होंने कहा कि आम आदमी की आय नहीं बढ़ रही, लेकिन महंगाई दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। पेट्रोल, डीजल, खाद्य पदार्थों के साथ-साथ अब आभूषण भी आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं।पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार केवल पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है, जबकि गरीब, किसान और युवा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जनता भाजपा को इसका जवाब देगी।

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मुंबई, 31 जानेवारी 2026:
बॉम्बे उच्च न्यायालयाने झोपडपट्टी पुनर्वसन प्राधिकरण (SRA) व त्याच्या धोरणात्मक अंमलबजावणीवर पुन्हा एकदा कडक सूचना दिल्या आहेत, त्यामुळे प्राधिकरण आणि त्याच्या कामकाजासंबंधी प्रश्न पुन्हा एकदा चर्चेत आले आहेत.

न्यायालयाने विशेषत: झोपडपट्टीवासीयांच्या तक्रारींवर त्वरित आणि प्रभावी निर्णय घेण्याचे SRAला निर्देश दिले आहेत. कोर्टाने म्हटले की — रिहायडींग झालेल्या किंवा रिहायडींग प्रक्रियेत असलेल्या लोकांच्या समस्यांवर विभागीय स्तरावरच तक्रारी संपविण्यासाठी “विशेष सेल” किंवा यंत्रणा निर्माण करणे आवश्यक आहे, नाहीतर प्रत्येक छोट्या तक्रारीसाठी न्यायालयाकडे धावणे आवश्यक होईल.

याच पार्श्वभूमीवर SRAने सेटेलाइट इमेजिंग आधारित डिजिटल प्लॅटफॉर्म म्हणजे Netram सुरू केला आहे, ज्याद्वारे मुंबईतील नवीन आणि जुने अवैध वसाहतींचे बदल अधिक प्रभावीपणे शोधून काढले जातील. या प्लॅटफॉर्मचा उद्देश आहे की कोणत्या भागात नव्या संरचना पिढ्यांमुळे वाढल्या आहेत आणि त्या स्लम पुनर्विकासाच्या पात्रतेवर कसा परिणाम करतात हे स्पष्ट करता येईल.

तरीही उच्च न्यायालयाने SRAबाबत काही तक्रारी आणि धोरणात्मक दोषांवर चिंता व्यक्त केली आहे. न्यायालयाने आधीही सरकार आणि प्राधिकरणाला काही प्रकल्पांमध्ये प्रक्रियात्मक त्रुटींबद्दल सवाल केला आहे, ज्यात काही प्रकल्पांमध्ये जमीन अधिग्रहणाचे निर्णय योग्य कायदेशीर प्रक्रिया न पाळता घेतले गेले असल्याचे मुद्दे समोर आले आहेत.

विशेष म्हणजे, या सर्व प्रक्रियांमध्ये झोपडपट्टीवासीयांचे हक्क व सुरक्षितता सुनिश्चित करणे अत्यंत महत्त्वाचे असल्याचे न्यायालयाने वारंवार जाहीर केले आहे. न्यायालयाने SRAला सांगितले आहे की झोपडपट्टी पुनर्वसन कायद्याअंतर्गत लाभार्थींना उचित माहिती, वेळीच व्यवहार आणि संरक्षणातील अधिकार मिळणे आवश्यक आहे.

काय अपेक्षित आहे?
SRAकडून तक्रारींचे निवारण जलदप्रकाशात होण्याची शक्यता वाढली आहे. डिजिटल साधनांच्या मदतीने अवैध वसाहतींची ओळख अधिक स्पष्ट होणार. न्यायालयाच्या निर्देशांनुसार भविष्यात प्रक्रियात्मक स्पष्टता आणि पारदर्शकता अपेक्षित आहे.

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बिहार के बांका जिला अंतर्गत धोरैया प्रखंड के ग्राम पंचायत घसीया में 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस समारोह बड़े ही हर्षोल्लास एवं धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ग्राम पंचायत घसीया के पंचायत सरकार भवन का शुभ मुहूर्त में विधिवत उद्घाटन किया गया।
उल्लेखनीय है कि पंचायत सरकार भवन का ऑनलाइन उद्घाटन पूर्व में हो चुका था, लेकिन गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर शुभ दिन एवं शुभ मुहूर्त में इसे विधिवत रूप से जनता को समर्पित किया गया। उद्घाटन कार्यक्रम का नेतृत्व माननीय मुखिया श्रीमती अनीता यादव एवं विपिन यादव के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में उपमुखिया संजय यादव, पंचायत सचिव मनीष कुमार, वीडियो अरविंद कुमार, सीईओ श्रीनिवास सिंह, बीपीओ अनुपम अनुराग, धोरैया थाना अध्यक्ष अमित कुमार, कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संजय यादव, पर्यवेक्षक मुकेश यादव, डाटा ऑपरेटर अमन कुमार, वार्ड सदस्य नित्यानंद गोस्वामी, बबीता देवी सहित पंचायत के सभी वार्ड सदस्य एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
उद्घाटन के दौरान मुखिया कक्ष, कार्यालय, लाइब्रेरी भवन सहित पंचायत सरकार भवन के सभी कक्षों का शंख, घंटी एवं विधिविधान के साथ फीता काटकर उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में ग्रामीण एवं आमजन की उपस्थिति रही, जिससे पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
समारोह के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया तथा राष्ट्रीय गान के साथ रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। वहीं भंडारे का भी आयोजन किया गया, जिसमें करीब एक हजार लोगों ने खिचड़ी का भोग ग्रहण किया।
पूरे कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा आम जनता का सम्मान किया गया और ग्राम पंचायत घसीया में विकास के नए आयाम स्थापित करने का संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

रिपोर्टर – संजीत गोस्वामी
अंग संदेश। व, ऑल इंडिया मीडिया एसोसिएशन
जन-जन की आवाज
जय हिंद, जय भारत 🇮🇳

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सीकर- यह अत्यंत गर्व और हर्ष का विषय है कि डॉक्टर सिमरन चौहान, पुत्री मोहम्मद शकील चौहान (बोलका) ने आप सभी की दुआओं और रब्बुल आलमीन के करम से FMGE परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस सफलता के साथ उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि कौम-ए-कुरैश और समस्त समाज का नाम रोशन किया है।

डॉक्टर सिमरन चौहान की यह कामयाबी उनकी निरंतर मेहनत, अनुशासन, लगन और मजबूत आत्मविश्वास का परिणाम है। FMGE जैसी कठिन परीक्षा को पास करना यह सिद्ध करता है कि लक्ष्य के प्रति समर्पण और ईमानदार प्रयास से किसी भी ऊँचाई को हासिल किया जा सकता है।

गौरतलब है कि डॉक्टर सिमरन मरहूम यूसुफ चौहान (बोलका) की पोती एवं मोहम्मद अकरम खत्री (पार्षद) के मामा जी की दुख्तर हैं। ननिहाल पक्ष की ओर से उनके नाना—लियाकत अली, पुत्र गन्नी हाजी इंदु बड़गुजर निवासी बैर की ढाणी (गणेशपुरा, डीडवाना-कुचामन) ने अपनी प्यारी नातिन की इस शानदार सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ एवं दुआएँ दी हैं।

परिजनों एवं समाजजनों ने बताया कि डॉक्टर बनकर सिमरन चौहान ने सेवा और मानवता के पवित्र मार्ग को चुना है। उनसे यह अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने ज्ञान, अनुभव और संवेदनशीलता से वतन व कौम की सेवा करेंगी और समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए आशा की किरण बनेंगी।

यह सफलता समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश भी है। शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब बेटियाँ शिक्षित होकर आगे बढ़ती हैं, तो पूरा समाज प्रगति करता है। डॉक्टर सिमरन चौहान की उपलब्धि इस बात का सशक्त उदाहरण है कि शिक्षा ही सशक्त, आत्मनिर्भर और उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।

क्षेत्रवासियों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों ने डॉक्टर सिमरन चौहान को लाखों मुबारकबाद देते हुए उनके स्वस्थ, सफल और सेवा-प्रधान भविष्य की कामना की है।

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मनोज शर्मा,चंडीगढ़, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भारत सरकार के प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म PRAGATI (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) की प्रशंसा करते हुए इसे विकास परियोजनाओं को तेज करने और जन शिकायतों का समाधान करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बताया। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र, राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों के बीच समन्वय को मजबूत करने के लिए प्रमुख योजनाओं की प्रत्यक्ष, वास्तविक समय की निगरानी को सक्षम बनाता है।
नायब सिंह सैनी के अनुसार, PRAGATI प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पारदर्शी,जवाबदेह शासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है और विकसित भारत @2047 के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,जिससे सार्वजनिक कल्याण पहलों का तेजी से निष्पादन और प्रभावी वितरण सुनिश्चित होता है।
हरियाणा में वर्तमान में देखरेख अधीन 112 प्रमुख परियोजनाओं में से 57 पहले ही चालू हैं, जिनमें 94,153 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, जबकि शेष 55 परियोजनाएं—जिनकी कीमत 5.44 लाख करोड़ रुपये है—अभी कार्यान्वयनाधीन हैं।
चालू परियोजनाओं में से, प्रधानमंत्री के PRAGATI (Pro-Active Governance and Timely Implementation) प्लेटफॉर्म के तहत 13 परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिनकी कीमत 30,463 करोड़ रुपये है। क्षेत्रवार, सड़कें और राजमार्ग 30 पूर्ण परियोजनाओं के साथ शीर्ष पर हैं, इसके बाद तेल और गैस (10), बिजली संचरण और वितरण (9), रेलवे (4), बिजली उत्पादन (3), और एक रियल एस्टेट परियोजना हैं। इन पूर्ण संपत्तियों ने हरियाणा की कनेक्टिविटी, ऊर्जा अवसंरचना और औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को काफी मजबूत किया है।
इस बीच, 55 कार्यान्वयनाधीन परियोजनाओं में से 13 उच्च मूल्य वाली परियोजनाएं, जिनमें 2.24 लाख करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, PRAGATI के तहत निकट देख रेख में हैं। क्षेत्रीय वितरण कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाओं पर निरंतर ध्यान दिलाता है, जिसमें सड़कें और राजमार्ग 22 परियोजनाओं के साथ सबसे आगे हैं, इसके बाद स्वास्थ्य सेवा (9), रेलवे (5), तेल और गैस (5), बिजली संचरण और वितरण (4), आईटी/आईटीईएस (3),और बिजली उत्पादन (3) इसके अलावा,मेट्रो रेल,उद्योग और वाणिज्य,लॉजिस्टिक्स पार्क विकास,और सीमेंट विनिर्माण में प्रत्येक एक-एक परियोजना चल रही है।
इन चल रही पहलों में से कई एनसीआर क्षेत्र की सबसे बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं में शामिल हैं, जिनमें एक्सप्रेसवे, समर्पित माल गलियारे, टेलीकॉम संतृप्ति अभियान, और प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान शामिल हैं—जो हरियाणा के दीर्घकालिक, विकास-उन्मुख अवसंरचना विकास की दिशा में प्रयासों को दर्शाते हैं।

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लोनी: यूजीसी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगाए जाने के बाद ब्राह्मण समाज ने लोनी में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में ब्राह्मण सभा के नेताओं ने एकजुट होकर इस लड़ाई को टीमवर्क की तरह लड़ने का संकल्प लिया।सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन जताते हुए ब्राह्मण नेताओं ने कहा कि हम इसे एक टीम की तरह देख रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई गलत निर्णय लिया गया तो आंदोलन जारी रखा जाएगा। ब्राह्मण सभा के उपाध्यक्ष अंकुर जी ने कहा, "हम पर देश के प्रधानमंत्री मोदी जी का बहुत बड़ा एहसान है। उन्होंने सवर्ण वर्ण समाज को पहचान दी।"अंकुर जी ने आगे बताया, "19 मार्च तक इस पर रोक लगी है। अगर यह काला कानून वापस नहीं लिया गया तो ब्राह्मण पूरी ताकत से आंदोलन करेगा। हम जातियों में बंटे नहीं हैं—यहां ब्राह्मण, ठाकुर, बनिया, त्यागी सब एक मंच पर हैं। ब्राह्मणों की एक ही आवाज और एक ही ताकत है।"सांस लेते हुए उन्होंने कहा, "मैं सुप्रीम कोर्ट के जज का सम्मान करता हूं। ब्राह्मण ने हमेशा समाज में एकता की बात की, लेकिन इस कानून ने हमें ही बांट दिया। हम सरकार को वोट देते थे, लेकिन सरकार ने हमें ही काट दिया।" उन्होंने मांग की कि यूजीसी का कानून लागू नहीं किया जा सकता और सरकार को सही दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।क्या आप इस खबर में कोई अतिरिक्त डिटेल जोड़ना चाहेंगे, जैसे फोटो कैप्शन या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए संक्षिप्त वर्शन?

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चिरकुंडा: नगर परिषद चुनाव की सुगबुगाहट के बीच अब चेयरमैन पद की दौड़ दिलचस्प हो गई है। प्रसिद्ध समाजसेवी और शिक्षिका शाहीन परवीन ने आधिकारिक तौर पर अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। उनके इस कदम ने स्थानीय राजनीति में सेवा और समर्पण की एक नई बहस छेड़ दी है।
शाहीन परवीन केवल एक नाम नहीं, बल्कि चिरकुंडा के लोगों के लिए भरोसे का प्रतीक रही हैं। पेशे से एक शिक्षिका होने के नाते उन्होंने हमेशा शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत माना है। उनके समर्थकों का कहना है कि वे राजनीति में सत्ता के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए कदम रख रही हैं।
शाहीन परवीन बताया: "मेरा उद्देश्य राजनीति को केवल चुनाव तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि चिरकुंडा के हर घर तक विकास और शिक्षा की रोशनी पहुँचाना है।"

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नई दिल्ली/लखनऊ। भारतीय किसान नेता राकेश टिकैत द्वारा आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने संबंधी बयान पर देशभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। टिकैत ने कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में किसी एक वर्ग को पूरी तरह सक्षम या पूरी तरह पीड़ित नहीं कहा जा सकता। हर समाज में आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी हैं और ऐसे परिवार भी हैं जिन्हें वास्तविक मदद की आवश्यकता है।

राकेश टिकैत ने अपने बयान में साफ कहा कि आरक्षण का उद्देश्य जरूरतमंदों को आगे बढ़ने का अवसर देना है, न कि समाज को वर्गों में बांटना। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है, तो उसे आरक्षण और सरकारी सहायता मिलनी चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति या वर्ग से संबंधित हो। उनका कहना है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू होने से वास्तविक गरीबों तक लाभ पहुंचेगा।

इस बयान के बाद किसानों, युवाओं, मजदूरों और सामाजिक संगठनों में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। लोगों का मानना है कि आर्थिक आधार को प्राथमिकता देने से समाज में आपसी सद्भाव बढ़ेगा और आरक्षण को लेकर फैल रही गलतफहमियां भी कम होंगी। कई युवाओं ने इसे समान अवसर की दिशा में अहम कदम बताया है।

सामाजिक बुद्धिजीवियों का कहना है कि राकेश टिकैत का यह विचार समावेशी है और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की बात करता है। यह सोच न केवल गरीबों को राहत देने वाली है, बल्कि देश में सामाजिक संतुलन बनाए रखने में भी सहायक हो सकती है।

कुल मिलाकर, राकेश टिकैत के आर्थिक आधार पर आरक्षण संबंधी बयान को समाज के हर वर्ग द्वारा सकारात्मक रूप में लिया जा रहा है और इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक सार्थक पहल माना जा रहा है।

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बदायूं थाना बिल्सी: गैंगस्टर एक्ट में वांछित अभियुक्त कासिम गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायूँ डॉ. बृजेश कुमार सिंह के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत दिनांक 30.01.2026 को थाना बिल्सी पुलिस ने मु0अ0सं0 003/2026 धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट में वांछित अभियुक्त कासिम पुत्र बुद्धु निवासी ग्राम खेड़ा नवादा थाना सिविल लाइन जनपद बदायूँ को दातागंज तिराहे के पास से गिरफ्तार किया। अभियुक्त के विरुद्ध पूर्व में भी विभिन्न आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस द्वारा गिरफ्तार अभियुक्त को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। गिरफ्तारी उपनिरीक्षक मौहित नैन मय पुलिस टीम द्वारा की गई।

#पत्रकार आमिर महफूज खान
Aima media reporter

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