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कछौना(हरदोई)। नगर में लंबे समय से एक असहाय वृद्घ मोहल्ले व गलियों में घसीट घसीटकर चलने को विवश थे। यह दृश्य इंसानियत को झकझोर देने वाला था। असहाय बुजुर्ग उम्र के पड़ाव के कारण शारीरिक व मानसिक रूप से असमर्थ हो गए। भारतीय संस्कृति में बुजुर्गों के प्रति सम्मान की लंबी परंपरा है, लेकिन आधुनिकता की भाग दौड़ में इंसानियत व मानवता के मूल्यों में गिरावट आई है। वृद्धावस्था के कारण यह बुजुर्ग लंबे समय से कस्बे में शारीरिक असमर्थता के कारण घसीट घसीटकर जीवन जीने का संघर्ष कर रहे हैं। 

स्थानीय नागरिकों द्वारा इनके भोजन की व्यवस्था कर दी जाती है। दयालु नागरिकों के द्वारा पानी व खाने की व्यवस्था कर दी जाती है। इस मार्ग पर प्रतिदिन जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, राजनीतिक व्यक्ति, सामाजिक संगठन प्रतिदिन गुजरते हैं। परंतु किसी ने भी इस बुजुर्ग की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा। कई संस्थाएं बुजुर्गों के नाम पर वृद्धावस्था आश्रम चलाकर लाखों रुपए का बजट डकार रहे हैं। आधुनिकता की अंधी दौड़ में सभी अपनी अपनी जिंदगी जीने में मशगूल हैं। चंद दिनों बाद यह बुजुर्ग सिस्टम की भेंट चढ़ जाएगा, इनकी अंतिम यात्रा किसी गली या सड़क किनारे समाप्त हो जाएगी।
 
कछौना के ईमानदार छवि के खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार बोस ने मानवता का परिचय देते हुए इस बुजुर्ग के लिए चलने फिरने के लिए ट्राई साइकिल भेंट की। जिससे यह बुजुर्ग को आवागमन में राहत मिलेगी। अब वह घसीट घसीटकर चलने को मजबूर नहीं होंगे।

कछौना के व्यापारी गोपाल अग्रवाल, अरविंद गुप्ता, राम कुमार राठौर, प्रधानाचार्य कानपुर पब्लिक स्कूल के रघुनाथ प्रसाद यादव, बैजनाथ, सी०एस० गुप्ता, अमित कुमार आदि ने आगे आकर अपने अपने स्तर से बुजुर्ग की सहायता की। खंड शिक्षा अधिकारी के इस कार्य की लोग भूरि भूरि सराहना कर रहे हैं।

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