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 प्रयागराज ।  महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में अभियुक्तों का नारको टेस्ट कराने की अनुमति सीबीआई को नहीं मिल सकी।

मामले के तीनों अभियुक्तों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेशी के दौरान अदालत को टेस्ट कराने की सहमति नहीं दी। अभियुक्तों की सहमति न मिलने पर कोर्ट ने सीबीआई की अर्जी खारिज कर दी है।

यह आदेश सीजेएम हरेंद्र नाथ ने सीबीआई की अर्जी पर सुनवाई करते हुए अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ता सुधीर श्रीवास्तव और विजय द्विवेदी को सुन कर दिया है। आनंद गिरि सहित तीनों अभियुक्तों का नारको टेस्ट कराए जाने के लिए सीबीआई ने 12 अक्तूबर को सीजेएम की अदालत में अर्जी दी थी। इस पर सोमवार को सुनवाई हुई। जेल से तीनों अभियुक्त वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत के सामने उपस्थित हुए। अदालत ने तीनों अभियुक्तों से उनकी नारको टेस्ट कराए जाने के संबंध में सहमति जाननी चाही। इस पर तीनों अभियुक्तों ने नारको टेस्ट कराए जाने की सहमति नहीं दी।

अदालत ने इसके बाद सीबीआई की अर्जी खारिज कर दी और अभियुक्तों की न्यायिक अभिरक्षा को 30 अक्तूबर तक के लिए बढ़ा दिया।

उल्लेखनीय है कि संविधान के अनुच्छेद 20(3) के तहत किसी भी व्यक्ति को उसके खुद के खिलाफ साक्ष्य देने के लिए विवश नही किया जा सकता है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने नारको टेस्ट का आदेश देने के लिए आरोपियों की सहमति पूछी थी, जिससे तीनों ने इनकार कर दिया

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