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कुल्लू। एचपीयू में अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों के लिए बिना नेट, जेआरएफ के पीएचडी में सीधे प्रवेश देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। जानकारी के मुताबिक ईसी की अलग-अलग हुई बैठक में तीन तरह की कैटेगरी के लिए पीएचडी में सीधे प्रवेश को मंजूरी दी गई है।

पहला इसमें जेआरएफ या इसके समकक्ष डिग्री करने वाले पात्र होते हैं दूसरा, दिव्यांग वर्ग के लिए एक-एक सीट आरक्षित है और तीसरा शिक्षक और कर्मचारियों के बच्चों के लिए सीधे प्रवेश का प्रावधान है। इसमें पहली दो कैटेगरी के लिए ईसी से मंजूरी मिलने के बाद इसके लिए विज्ञापन निकाला गया लेकिन तीसरी कैटेगरी जिसमें कर्मचारियों और शिक्षकों के बच्चों को बिना एंट्रेंस के एडमिशन दी जानी थी उसके लिए कोई विज्ञापन नहीं निकाला गया। इसका सीधा मतलब ये है कि विभागों में बाकी कर्मचारियों के बच्चे आवेदन न करें इसके लिए चुपचाप एडमिशन करवाई गई। एचपीयू की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी दाखिले में विश्वविद्यालय अध्यापकों के बच्चों को बिना नेट, जेआरएफ व प्रवेश परीक्षा के दाखिला देना के निर्णय का विरोध किया है।


अभाविप हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने बताया कि विश्वविद्यालय के द्वारा अध्यापकों के बच्चों को पीएचडी दाखिलों में अनुचित तवज्जो देना आम छात्रों के साथ धोखा है और संविधान के अंतर्गत समानता के अधिकार के विरुद्ध भी है। उधर, एनएसयूआई के अध्यक्ष छतर सिंह का कहना है कि इस मामले में छात्र संगठन उग्र आंदोलन करेंगे। एचपीयू में इस प्रकार की धांधली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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