बाइकिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय बाइक राइडर योगेश शर्मा।
बाइकिंग एंड एडवेंचर स्पोर्ट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय बाइक राइडर योगेश शर्मा द्वारा एडवेंचर स्पोर्ट्स को अधिक लोकप्रिय बनाने और युवाओं में साहसिक गतिविधियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित एडवेंचर माउंटेन ट्रैकिंग / हाइकिंग अभियान को सफलतापूर्वक पूर्ण कर सुरक्षित वापसी की गई।
यह अभियान हिमालय की प्रसिद्ध धौलाधार पर्वत श्रृंखला स्थित त्रियुंड पर्वत तक पहुंचने का था। अभियान का शुभारंभ 21 मई को हिमाचल प्रदेश के मैक्लोडगंज के भागसूनाग क्षेत्र से प्रातः 9 बजे किया गया। दुर्गम और खड़ी पहाड़ियों, विशाल चट्टानों तथा पथरीले रास्तों के बीच लगातार कठिन चढ़ाई करते हुए लगभग दोपहर 3:30 बजे त्रियुंड पर्वत शिखर तक पहुंचने में सफलता प्राप्त हुई।
शिखर पर पहुंचने के बाद रात्रि विश्राम हेतु टैंट स्थापित किया गया। प्रारंभ में मौसम सामान्य रहा। रात्रि भोजन के पश्चात ठंड से बचाव के लिए लकड़ियां एकत्रित कर आग जलाई गई। किंतु मध्य रात्रि के बाद मौसम ने अचानक भयावह रूप धारण कर लिया। तेज बारिश, बिजली की कड़क और तीव्र हवाओं ने पूरे क्षेत्र को तूफानी परिस्थितियों में बदल दिया।
रात्रि लगभग 2 बजे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। तेज तूफानी हवाओं के बीच टैंट बुरी तरह फड़फड़ाने लगा। इसी दौरान टैंट को संभालने वाली मुख्य रस्सियों में से एक टूट गई, जिससे खतरा कई गुना बढ़ गया। लगातार तेज बारिश और बिजली चमकने के बीच ऐसा महसूस होने लगा मानो यह रात अत्यंत कठिन साबित हो सकती है।
प्रातः लगभग 5 बजे कुछ समय के लिए मौसम हल्का पड़ा, जिसके बाद तुरंत आवश्यक सामान बैग में रखकर नीचे स्थित एक टिन शेड तक पहुंचकर शरण ली गई। सुबह लगभग 7 बजे जब तूफान कुछ शांत हुआ और पुनः टैंट स्थल पर पहुंचा गया, तब देखा कि दूसरी मुख्य रस्सी भी टूट चुकी थी तथा टैंट की ऊपरी परत उड़ जाने के कारण पूरा टैंट गिर चुका था। इस प्रकार यह अभियान एक बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिमपूर्ण अनुभव साबित हुआ, जिसमें बाल-बाल सुरक्षित बचाव संभव हो पाया।
22 मई की सुबह लगभग 9 बजे त्रियुंड पर्वत से वापसी यात्रा प्रारंभ की गई। लगातार रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण रास्ता अत्यंत फिसलन भरा हो चुका था। पहाड़ी मार्ग पर अत्यधिक सावधानी के साथ धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए हर कदम जोखिम से भरा प्रतीत हो रहा था, क्योंकि एक छोटी सी चूक गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती थी। अंततः दोपहर लगभग 2 बजे सुरक्षित रूप से नीचे पहुंचने में सफलता प्राप्त हुई।
22 मई को रात्रि विश्राम के पश्चात 23 मई को अलीगढ़ के लिए प्रस्थान किया गया तथा 24 मई को सुरक्षित अलीगढ़ वापसी हुई।
सही समय पर सही निर्णय, विपरीत परिस्थितियों में साहस, धैर्य और आत्मविश्वास बनाए रखने के कारण यह अभियान सफल रहा और सुरक्षित वापसी हो सकी।