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जातीय वैमनस्य फैलाना समाज और संस्कृति दोनों के लिए घातक : मोनू नैन

बागपत निवासी समाजसेवी मोनू नैन ने समाज में बढ़ती जातीय कटुता और एक-दूसरे की जातियों को लेकर की जा रही अपमानजनक टिप्पणियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि किसी भी जाति को नीचा दिखाकर अपनी जाति को महान साबित करना न केवल सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ता है, बल्कि यह हमारे संस्कारों और भारतीय संस्कृति का भी अपमान है।

मोनू नैन ने कहा कि भारत सदियों से भाईचारे, सम्मान, सहिष्णुता और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता रहा है। आज विदेशी लोग भारतीय संस्कृति, परंपराओं, योग, अध्यात्म और पारिवारिक मूल्यों को अपना रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमारे अपने लोग इन्हीं परंपराओं को ढकोसला बताकर उनसे दूरी बना रहे हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और समाज को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर जाति और धर्म के नाम पर लोगों को भड़काने तथा समाज को बांटने का प्रयास लगातार बढ़ रहा है, जिससे युवा पीढ़ी गलत दिशा में जा रही है। समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने वाली मानसिकता देश और समाज दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने सभी वर्गों से अपील की कि वे एक-दूसरे का सम्मान करें और सामाजिक एकता को मजबूत बनाने में योगदान दें।

मोनू नैन ने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता और एकता में है। यदि हम अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों का सम्मान नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों से दूर होती चली जाएंगी। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे जातिवाद और नफरत से ऊपर उठकर देशहित, समाजहित और मानवता को प्राथमिकता दें।

✍🏻 एडवोकेट ऋषभ पराशर (Rishabh Parasher), राष्ट्रीय अध्यक्ष, AIMA Media, All India Media Association (Y.C.)

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