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डॉ. अजय कुमार शर्मा ने वास्तु दोष निवारण पर विशेषज्ञ राय दी

डॉ. अजय कुमार शर्मा के अनुसार वास्तु शास्त्र दिशाओं और पंचतत्वों के संतुलन पर आधारित है। वे बताते हैं कि बाजार में उपलब्ध कई वास्तु उत्पाद सभी स्थानों के लिए लाभकारी नहीं होते और कभी-कभी हानि भी पहुँचा सकते हैं। समुद्री नमक से बने उत्पाद सात दिन से अधिक समय तक नहीं रखने चाहिए क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा पुनः फैलाने का कारण बन सकते हैं।

डॉ. शर्मा ने कछुए, बांस के पौधे, फिश एक्वेरियम, पिरामिड और लाफिंग बुद्धा जैसे वस्तुओं के उपयोग पर भी स्पष्ट किया कि इन्हें बिना विशेषज्ञ सलाह के उपयोग करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दिशा के लिए विशेष उपाय होते हैं और बिना सही दिशा और ज्ञान के पिरामिड या अन्य उत्पाद हानिकारक हो सकते हैं। सही वास्तु विश्लेषण और विशेषज्ञ सलाह आवश्यक है।

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