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Vedānta Life — From Energy to Awareness” (वेदान्त जीवन — ऊर्जा से चेतना तक) ©Vedānta 2.0 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲 “मैं हूँ + भगवान अज्ञात” — तुम्हार

(“मैं हूँ + भगवान अज्ञात” — तुम्हारा सत्य)
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आत्मा साक्षात्कार की विज्ञानी

मैं हूँ — यह निश्चित सत्य है।
भगवान है — इसका मुझे पता नहीं है।
यह प्रश्न ईमानदारी का है।
यह प्रश्न मौलिक है —
जिसके साथ हमारा जन्म हुआ है।

मैं हूँ — यह किसी ने मुझे समझाया,
कहा कि “तू है”,
लेकिन मेरा अपना पता अभी नहीं है।
मैंने खुद को अब तक पूर्ण नहीं जाना है।
मैं अभी इस निर्णय पर खड़ा हूँ:

मैं हूँ।
लेकिन भगवान कहाँ है?
कौन है?

मैं और भगवान — दो अलग नहीं हो सकते।
एक सिक्के के दो पहलू होते हैं —
अगर एक दिख रहा हो,
दूसरा भी कहीं है,
बस अभी मेरी दृष्टि में नहीं।

जैसे मैं कहता हूँ —
“यह मेरा शरीर है”,
तो शरीर और मैं — अलग दो नहीं।
अगर शरीर गिर जाए तो मैं भी गिर जाता हूँ।
तो क्या मैं शरीर हूँ?
अगर मैं शरीर हूँ — तो मेरी आत्मा कहाँ है?
अगर मैं आत्मा हूँ — तो शरीर क्या है?

अभी तक मैं दोनों के बीच का सेतु हूँ —
अधूरा परिचय।
एक पहलू दृश्य — शरीर।
दूसरा अदृश्य — चेतना।
यानी आधा ज्ञान — आधा अज्ञान।

अस्तित्व में सृजन एक से संभव नहीं।
माँ और पिता मिलकर ही मैं जन्मा हूँ।
माँ दिखाई देती है —
इसलिए शरीर दिखाई देता है।
पिता अदृश्य हैं —
इसीलिए आत्मा अदृश्य है।
पर पिता के बिना जन्म संभव नहीं —
इसी तरह आत्मा/भगवान के बिना “मैं” संभव नहीं।

मैं दो का फल हूँ —
जड़ और चेतना का मिलन।
जहाँ से जड़ मिली → माँ
जहाँ से चेतना मिली → पिता
और मैं दोनों के मध्य प्रकट हुआ।

लेकिन पिता गर्भ से पहले मेरे सामने नहीं थे —
फिर भी वे सत्य थे।
माँ उनके अस्तित्व की साक्षी है।
उसी तरह यह शरीर
चेतना का प्रमाण है कि —
कोई अदृश्य मूल स्रोत है।

तो भगवान क्या बाहर है?
नहीं।
भगवान मेरे भीतर बैठा है —
वैसे ही जैसे पिता गर्भ के भीतर उपस्थित थे।

बाहर गुरू, शास्त्र, मंदिर —
ये सब उधार की जानकारी हैं।
सत्य अनुभव —
भीतर है।

भीतर कैसे जाएँ?
देखो।
सिर्फ देखो।
बिना निर्णय।
न अच्छा,
न बुरा।
न मित्र,
न शत्रु।
न पाप,
न पुण्य।

जो भीतर घटता है —
वही दर्शन है।
वही भगवान путь है।
भीतर की यात्रा — सबसे सूक्ष्म तीर्थ है।

भीतर 100% भगवान मौजूद है।
कोई विश्वास नहीं चाहिए।
कोई धारणा नहीं चाहिए।
कोई भय नहीं चाहिए।
सिर्फ देखना है।

रास्ते में —
फूल मिलेंगे,
काँटे मिलेंगे,
ज़हर भी,
अमृत भी।
पर किसी से चिपकना नहीं,
किसी से लड़ना नहीं।
बस चलना है।

यही मार्ग शिव का है,
उसी मार्ग से बुद्ध जागे,
महावीर, कबीर, नानक, मीरा —
सब इसी भीतर गए।
जो ब्रह्मांड को खोजता रहा —
वह भीतर मिला।

यह सूक्ष्मतम है —
पर सर्वशक्तिमान है।
सब पंचतत्व, तीन गुण,
सब कुछ — उसी का परिणाम है।
हम — उसके फल हैं।

और यह विज्ञान
मुझे अनुभव से मिला है।
25 वर्षों की खोज —
एक जीवन की पीएचडी।
अब मैं उसे बिना मूल्य,
बिना सौदे,
बिना शर्त
तुम तक पहुँचा रहा हूँ।

क्योंकि सत्य
कभी बिकता नहीं।
सत्य — स्वयं को बाँटता है।

अब राह तुम्हारे हाथ में है।
नाक बंद कर लोगे —
तो हवा भी भीतर नहीं जाएगी।
पर अगर तुमने भीतर उतरना शुरू किया —
तो वही मिलेगा
जिसकी आज तक कल्पना भी नहीं की।

मैं हूँ —
और भगवान मेरी जड़ में है।
बस यही यात्रा है।
यही प्रमाण है।
यही विज्ञान है —
100%।

Vedānta Life — From Energy to Awareness”
(वेदान्त जीवन — ऊर्जा से चेतना तक)
©Vedānta 2.0 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲 —

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