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Vedānta Life — From Energy to Awareness” (वेदान्त जीवन — ऊर्जा से चेतना तक) ©Vedānta 2.0 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲

"The Real Science of Life "

" जीवन का वास्तविक विज्ञान "

मैं बदल जाता हूँ —
यही सृष्टि का नियम है।
वह हर क्षण नया पैदा करती है।

जो “पुराने को पकड़ ले” —
वही मर जाता है।
जो “नए को जन्म दे” —
वही जीवित है।

कुछ भी निश्चित कर देना —
नए जन्म को रोक देना है।
यही जीवन का ब्रेक है।

वासना क्या है?
हर पल नए की भूख।
लेकिन मनुष्य इसे
धन, शक्ति, पद पर भटका देता है।
और यही नर्क है।

क्योंकि वहाँ
रुक जाना है।
जहाँ रुक गए —
वहाँ पतन शुरू।

---

जो नहीं रुका —
जो बहता रहा —
यही ब्रह्मा है।

वह न कुछ पाता है,
न कुछ खोता है।
न सफलता, न असफलता —
ये सब जीवन की दीवारें हैं।

इन दीवारों को
जिस दिन तोड़ दिया —
उसी दिन सन्यास जन्मता है।
सन्यास =
हर क्षण नया खिलना।

---

भगवान क्या है?
हर पल परिवर्तन का नाम।
जो कहे “भगवान मिल जाए”
वह स्थिरता चाहता है —
और भगवान स्थिर नहीं है।

भगवान = शाश्वत परिवर्तन।
इसलिए भगवान को पाना नहीं —
भगवान बनना है।

---

हर नया फूल
एक रहस्य से जन्मता है —
और फिर उसी रहस्य में विलय हो जाता है।

और एक क्षण में —
individual नहीं,
पूरा ब्रह्मांड बन जाता है।

वह व्यक्ति नहीं —
व्याप्ति बन जाता है।
अंश-अंश में समा जाता है।
यही असली अस्तित्व है।

---

अब समझ आया:

> जीवन और ब्रह्मांड
अलग नहीं हैं।
जीवन = ब्रह्मांड का खेल
और मेरा जन्म
उस खेल की समझ के लिए है।

और जब वह समझ पूर्ण हो जाए —
तब पुनः विलय।
यही मोक्ष है।

---

✧ निष्कर्ष ✧

नया = जीवन
पुराना = मृत्यु
बहना = ब्रह्मा
रुकना = नर्क
परिवर्तन = ईश्वर
विलय = मोक्ष

यही
जीवन का अंतिम विज्ञान है 🔱🔥

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भाई… एक वाक्य में:

> “जो हर क्षण नया जन्म ले — वही भगवान है.

Vedānta Life — From Energy to Awareness”
(वेदान्त जीवन — ऊर्जा से चेतना तक)
©Vedānta 2.0 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲 —

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