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“फर्जी छात्र-आईडी घोटाला: जलगाँव की 154 स्कूलों के वेतन बिल रद्द”

“अब मंजूर पदों से ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती करके उनका वेतन निकालने वाली कुल 154 स्कूलों के वेतन बिल रद्द कर दिए गए हैं।”
जलगांव:
जिले में सामने आए बनावट शालार्थ ID घोटाले में माध्यमिक वेतन पथक के अधीक्षक राजमोहन शर्मा को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। इसके साथ ही दो संस्था संचालकों और जिला परिषद के दो कर्मचारियों के खिलाफ भी हाल ही में मामला दर्ज किया गया है। अब इस प्रकरण में संचालक मान्यता (Sanctioned Posts) से अधिक पद भरकर उनका वेतन काढने वाली 154 शालाओं के वेतन बिले रद्द कर दिए गए हैं।
अमळनेर तालुका के मनोज रामचंद्र पाटिल, दत्तात्रय पाटिल तथा जिला परिषद कर्मचारी अविनाश पाटिल और नीलेश निंबा पाटिल — इन चारों पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। शिक्षा विभाग के उपसंचालक भाऊसाहेब चव्हाण ने इस संबंध में शिकायत की थी। आरोप है कि इन लोगों ने दिसंबर 2023 से मार्च 2025 के बीच कुछ मुख्याध्यापकों की मिलीभगत से शालार्थ प्रणाली में कई फर्जी छात्र ID बनाई।
इन नकली नोंदियों के आधार पर सरकार से मिलने वाले करीब 10 करोड़ रुपये के अनुदान को गैरकानूनी तरीके से हड़पने की बात शिकायत में कही गई है। पूरे मामले की जांच आर्थिक गुन्हे शाखा को सौंपी गई है और आगे की पूछताछ जारी है। यह भी जांच की जा रही है कि इस घोटाले में और कितने संस्था चालक शामिल हो सकते हैं।
घोटाले के शक में 10 स्कूलों के मुख्याध्यापकों को शालार्थ प्रणाली, मान्यता आदेश और कागजातों की जांच के लिए नाशिक स्थित आर्थिक गुन्हे शाखा कार्यालय में तलब किया गया था। इसके बाद नाशिक की टीम जलगांव ZP के माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी पहुँची और संबंधित सभी दस्तावेज जब्त किए। जांच अधिकारियों ने आवश्यकता पड़ने पर दोबारा पूछताछ के लिए बुलाने की बात भी कही थी।
इसी दौरान पता चला कि कई स्कूलों ने मंजूर क्षमता (sanctioned posts) से अधिक पद भरकर उनके वेतन के बिल भी तैयार किए थे। इसी के चलते शिक्षा विभाग ने कठोर कार्रवाई करते हुए जलगांव की 154 शालाओं के 2024–25 के वेतन बिल रद्द कर दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद संबंधित संस्था संचालकों में अफरा-तफरी मच गई है।
पहले मुख्याध्यापक सीधे वेतन पथक कार्यालय को बिल भेजते थे, लेकिन अब प्रक्रिया बदल दी गई है। अब बिल पहले शिक्षणाधिकारी और उसके बाद उपसंचालक की जांच के बाद ही आगे भेजे जाएंगे। इससे उन संस्थाओं को बड़ा झटका लगा है जो जांच प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे वेतन बिल निकाल लेती थीं।

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