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देश के स्वर्णिम विकास और जनता को टैक्सो के भार से बचाने के लिए हड़ताल और अवकाश पर लगे पूर्ण रोक

देश में सरकारी बाबुओं को मिलने वाली छुट्टियों और इनके द्वारा की जाने वाली हड़तालों से भले ही सरकार को कुछ महसूस ना होता हो मगर जिस आम जनता के द्वारा भरे जाने वाले टैक्सों से इन्हे तनख्वाह मिलती है उनकी निगाह में यह हड़ताल और छुट्टियो में बढ़ोतरी को उचित नही बताया जाता। अब पितृत्व अवकाश के रूप में कुछ छुट्टियां और देने या दिये जाने की योजना परवान चढ़ रही बताते है इस संदर्भ में प्राप्त एक खबर के अनुसार पिता बनने के दौरान भारतीय कप्तान विराट कोहली क्रिकेट मैदान से दूर रहे, इसे लेकर इंटरनेट मीडिया पर काफी चर्चा हुई, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है-पिता बनने की जिम्मेदारी। अगर इसे कानून की निगाह से देखा जाए तो मां को कानूनन छह महीने का मातृत्व अवकाश मिलता है, पितृत्व अवकाश के लिए कोई कानून नहीं है। सर्विस रूल के तहत केंद्र सरकार पिता को 15 दिन का पितृत्व अवकाश देती है।
वर्ष 2017 में महाराष्ट्र के सांसद राजीव साटव ने पिता के हितों को संरक्षित करने के लिए पैटेरनिटी बेनीफिट बिल पेश किया था। इसमें असंगठित और निज क्षेत्र में 15 दिन के पितृत्व अवकाश का प्रस्ताव था जो तीन माह तक बढ़ाया जा सकता था, लेकिन उनका प्रयास सिरे नहीं चढ़ सका। देश में पितृत्व अवकाश की मौजूदा स्थिति देखी जाए तो आल इंडिया सर्विस रूल के तहत केंद्र सरकार अपने पुरुष कर्मचारियों को दो बच्चों के जन्म के समय 15 दिन का संवैतनिक अवकाश देती है। अब इसको लेकर मांग तेज होने लगी है।
कई जगह सीनियर एचआर एक्जीक्यूटिव रह चुकी अदिति कहती हैं कि इस बारे में कानून होना चाहिए। जबलपुर की पुष्पा बेरी भी मानती हैं कि 15 दिन का पितृत्व अवकाश काफी कम है क्योंकि बच्चे के जन्म से पिता की जिम्मेदारियों में काफी बढ़ोतरी होती है।
मेरी निगाह में देश के स्वर्णिम विकास को गति देने टैक्स दाताओं पर पड़ने वाली आर्थिक भार से उन्हे बचाने तथा हर व्यक्ति की खुशहाली को ध्यान में रखते हुए सरकार को अब किसी भी प्रकार की छुट्टियों में बढ़ोतरी तो करनी ही नही चाहिए आये दिन सुरशाह के मुंह की भांति बढ़ती अपनी मांगों को लेकर जो हड़ताल की जाती है उन पर पूर्ण रोक लगायी जाये और अगर कोई फिर भी करता है तो इस दौरान की तनख्वाह काटी जाये और इससे भी सुधार ना हो तो बेजरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए की जाये नई भर्ती।
जिन विराट कोहली को लेकर यह चर्चा चली उनके पास साधन और पैसे की कोई कमी नही है इसलिए उन्हे इस मामले में प्रेरणा स्त्रांेत मानकार कोई भी फैसला नही लिया जाना चाहिए और अगर सरकार को लगता है की यह जरूरी है तो फिर वो व्यापारियो किसानों, उद्योगपतियों के लिए भी पितृत्व अवकास तय करे और इस दौरान उनकी इनकम के हिसाब से अवकाश के दिनो का भुगतान सभी को सरकरी बाबुओं के समान सरकारी खजानें से किया जाना चाहिए क्योकि हम भी इसी देश के नागरिक है और जो समस्याएं प्रसव के दौरान सरकारी कर्मचारियों के समक्ष आती है वो ही हमारे समक्ष भी उत्पन्न होती है।

– रवि कुमार विश्नोई
सम्पादक – दैनिक केसर खुशबू टाईम्स
अध्यक्ष – ऑल इंडिया न्यूज पेपर्स एसोसिएशन
आईना, सोशल मीडिया एसोसिएशन (एसएमए)
MD – www.tazzakhabar.com


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