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*पृथ्वी के विचित्र जीव - नेता (भाग 2)*

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बहुत मजबूत दिखाई देने वाले बड़े-बड़े नेता भी कई बार अपनी बात से मुकर जाते हैं पलट जाते हैं और ठीक उल्टा आचरण करने लगते हैं, जिस पार्टी को वे अपना घर बताते हैं, अपनी मां बताते हैं उसी में उन्हें अचानक कमियां दिखाई देने लगती हैं और उसे आसानी से छोड़ जाते हैं , बुराई भी उसे स्तर की जैसे कोई दुश्मन कर रहा हो l

लिए ऐसे ही कुछ मन नहीं उसे आपका परिचय कराते हैं -

*1. उद्धव ठाकरे-* महाराष्ट्र में हिंदुत्व का सबसे बड़ा ब्रांड शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपनी विचारधारा से पूरी तरह पलट गए , सत्ता प्राप्त करने के लिए उन्होंने कांग्रेस और एनसीपी से हाथ मिला लिया l
इस गठबंधन से कुछ दिन पहले तक उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनसीपी को कोसते थे, लेकिन फिर सब भूल गए l अब ऐसे में कोई उनसे यह पूछ ले कि उद्धव जी जो आप पहले कह रहे थे क्या वह झूठा था अगर हां तो आपने झूठ क्यों बोला और अगर सही था तो आपने कांग्रेस और एनसीपी से हाथ क्यों मिलाया ?

*2.हेमंत विस्वा सरमा-* असम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्वा सरमा पहले कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए नेता थे भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कोसने में कोई कमी नहीं छोड़ते थे लेकिन उसके बाद अचानक इनका हृदय परिवर्तन हुआ और इन्हें कांग्रेस में कमियां नजर आने लगी l अब
अगर कोई इसे यह पूछ ले कि आपको जो कमियां भाजपा और आरएसएस में दिखाई देती थी क्या वह अब खत्म हो गई या वह झूठी थी ?

*3.शिवपाल सिंह यादव "चाचा जी"-* समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव जो समर्थकों के बीच में "चाचा जी" के नाम से मशहूर हैं ने भी समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाई थी , हालांकि कुछ समय बाद प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का विलय समाजवादी पार्टी में हो गया लेकिन इस बीच के समय में शिवपाल सिंह ने एक बात कही थी *-" समाजवादी पार्टी पूरी तरह भटक गई है यह चोर उचक्कों की पार्टी हो गई है, माफियाओं की पार्टी है"* l
लेकिन अब चाचा स्वयं सपा में पुनः बड़े स्तर पर हैं तो अब सब साफ है l

*निष्कर्ष-* कोई भी राजनीतिक पार्टी दूध की धुली ही नहीं है, ऐसी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है जिसमें अपराधी प्रवृत्ति के लोग ठूंस - ठूंस कर ना भरे हो l सूत्र बताते हैं कि राजनैतिक पार्टियों को चलाने के लिए पैसे की आवश्यकता होती है और पैसे की व्यवस्था आम कार्यकर्ता की अपेक्षा अपराधी प्रवृत्ति के लोग जल्दी कर देते हैं और ज्यादा भी कर देते हैं इसीलिए उनकी आवश्यकता हर पार्टी को रहती है l याद रखिए *नेता किसी का न होता**
*भानु चौहान*
जिला एटा

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