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कानपुर में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवान और उनकी मां के इलाज से जुड़ी एक बेहद भावुक और बड़ी खबर

मुख्य विवाद (इलाज में लापरवाही का आरोप)
​पीड़ित परिवार: महाराजपुर ITBP कैंप में तैनात कांस्टेबल विकास सिंह (मूल निवासी: फतेहपुर) की 56 वर्षीय मां निर्मला देवी को सांस और कमजोरी की तकलीफ के बाद कानपुर के टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।
​हाथ काटने की नौबत: आरोप है कि इलाज के दौरान वेंटिलेटर पर उन्हें एक गलत इंजेक्शन दे दिया गया, जिससे उनका हाथ काला पड़ने लगा। इन्फेक्शन इतना ज्यादा फैल गया कि डॉक्टरों को अंततः उनका हाथ काटना पड़ा।
​जवान का दर्द: पीड़ित जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्मोकोल के बॉक्स में लेकर इंसाफ के लिए तीन दिनों तक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काटता रहा, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद वे पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के पास पहुंचे।
​2. पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेराव और अफवाहें
​जवानों का फूटा गुस्सा: जब स्वास्थ्य विभाग (CMO) की शुरुआती जांच रिपोर्ट में अस्पताल को क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई, तो ITBP के साथी जवानों और अधिकारियों का गुस्सा भड़क गया।
​कमिश्नरेट पहुंचे जवान: शनिवार (23 मई 2026) को ITBP के कमांडेंट गौरव प्रसाद की अगुवाई में लगभग 15 गाड़ियों और ट्रकों में सवार होकर करीब 50 से 100 हथियारबंद जवान कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए।
​अफवाहों का बाजार गर्म: अचानक इतनी बड़ी संख्या में फोर्स देखकर पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैल गई कि ITBP ने कमिश्नरेट पर 'कब्जा' कर लिया है। हालांकि, बाद में ITBP के आला अधिकारियों ने इस बात का पूरी तरह खंडन किया और कहा कि वे केवल अपने साथी को न्याय दिलाने और शांतिपूर्ण तरीके से बात करने आए थे।
​3. प्रशासन का एक्शन और वर्तमान स्थिति
​कमिश्नर की नाराजगी व निर्देश: पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने भारी संख्या में हथियारबंद जवानों के आने पर नाराजगी जताई, जिसके बाद आधे से ज्यादा जवान परिसर से बाहर चले गए।
​पुनः जांच के आदेश: पुलिस कमिश्नर ने फौरन सीएमओ (CMO) को तलब किया और गोलमोल रिपोर्ट देने के लिए फटकार लगाई। पीड़ित जवान जिन बिंदुओं से असंतुष्ट थे, उनके लिए एक नया पैनल गठित कर दोबारा निष्पक्ष जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
​कार्रवाई का आश्वासन: पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिया है कि नई जांच रिपोर्ट आते ही दोषी डॉक्टरों और अस्पताल के खिलाफ सख्त FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आश्वासन मिलने के बाद ही मामला शांत हुआ।

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