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डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी का लेख: मुफ्तखोरी को बताया सियासत का 'स्टेरॉयड'*

*"सुई वाला डॉक्टर चाहिए या बीमारी पकड़ने वाला?"*
डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी का लेख: मुफ्तखोरी को बताया सियासत का 'स्टेरॉयड'*

*पटियाला, 23 मई (विक्की हरिंदर पाल):* *मुफ्तखोरी की राजनीति* पर सवाल उठाते हुए डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी* ने एक लेख में इसे *'सियासी स्टेरॉयड'* करार दिया है। उन्होंने कहा कि आज भारत का शासन-प्रशासन बड़े चक्रों में फंस चुका है क्योंकि लोग *स्थिति को गहराई से सोचे बिना मौके का फायदा* देखने लगे हैं।

*"सुई वाला डॉक्टर या बीमारी पकड़ने वाला?"*

डॉ. मुल्तानी ने लिखा कि *मरीज उस डॉक्टर के पास ज्यादा जाते हैं जो सख्त दवा-टीका लगाकर तुरंत आराम तो दे देता है, पर बीमारी ढूंढने की कोशिश नहीं करता*। नतीजा, मरीज बाद में किसी गंभीर बीमारी में फंस जाता है।

उन्होंने कहा कि *सियासत में भी जो पार्टी मुफ्तखोरी का लालच देती है, लोग उसके पीछे वोट डाल देते हैं*। पर बाद में पछताते हैं, तब तक *"चिड़ियां खेत चुग चुकी होती हैं"*।

*स्टेरॉयड का उदाहरण:*

डॉ. मुल्तानी ने बताया कि *मेडिकल किताबों में स्टेरॉयड को 'मैजिक ड्रग'* लिखा है जो कई बीमारियों में बहुत जल्दी असर करती है। पर *अगर स्टेरॉयड लगातार बिना डॉक्टरी कंट्रोल के इस्तेमाल हो तो शरीर का सुरक्षा सिस्टम खराब कर देती है*। जिससे शरीर कई बीमारियों में घिर जाता है और जल्दी खत्म हो जाता है।

*"आज की सियासी स्थिति भी स्टेरॉयड के इस्तेमाल जैसी हो रही है, जिसे मुफ्तखोरी कहते हैं"*, उन्होंने लिखा। बहुत सारे राज्य मुफ्तखोरी के जाल में फंस चुके हैं और *लोगों की बुनियादी जरूरतें भी पूरी नहीं कर पा रहे*।

*पंजाब का जिक्र:*

डॉ. मुल्तानी ने लिखा कि *पंजाब में बड़ी मुफ्त सुविधाएं देने के कारण पंजाब सरकार अपने मुलाजिमों को डीए नहीं दे पा रही*। जिसका फायदा अब दूसरी सियासी पार्टियां ले रही हैं और सरकार पर हर किस्म के हमले कर *पंजाब सरकार को अस्थिर* कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि *अब पंजाब सरकार कोर्ट द्वारा मुलाजिमों के इंसाफ के तराजू में भी फंस गई* है, जिससे निकलना बहुत मुश्किल हो रहा है।

*मुफ्त बिजली* के चक्कर में *बिजली सब्सिडी ने बिजली कटों को जन्म दिया* है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो *धान का सीजन भी बहुत प्रभावित होगा*। फिर मुफ्त बिजली को वैसे ही याद करेंगे *जैसे PGI में दाखिल मरीज स्टेरॉयड खा-खा कर सुई वाले डॉक्टर को याद कर गालियां भी देता है और बड़ा खर्चा भी करता है*।

*तमिलनाडु और अन्य राज्यों का उदाहरण:*

उन्होंने लिखा कि दुख की बात है कि *बहुते लोग पुराने सुई वाले डॉक्टरों की करतूतों को भूल कर नए ढंग से सुई लगाने वाले डॉक्टर के पीछे लग जाते हैं*। जैसे *तमिलनाडु में आठ ग्राम सोना, कर्जे और बिजली माफ वाले विजय* की सोशल मीडिया पर वाह-वाह की जा रही है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से उन्होंने कहा कि *बड़े स्तर पर मुफ्तखोरी की बीमारी फैलाने वाले केजरीवाल और साथियों* के बारे में नए शगूफों के अंदाजे लग रहे हैं *जो पंजाब को सदा के लिए बर्बाद कर देंगे*।

*"पंजाब अंदर से खोखला हो गया":*

डॉ. मुल्तानी ने आरोप लगाया कि *पंजाब में केजरीवाल और साथियों ने मुफ्तखोरी वाले स्टेरॉयड से पंजाब को अंदर से खोखला कर दिया* और अब *जैन जी के मुखौटे के नीचे बर्बाद करने की तैयारी* कर रहे हैं।

*श्रीलंका-वेनेजुएला का हवाला:*

उन्होंने लिखा कि *संसार स्तर पर मुफ्तखोरी के टीके ने श्रीलंका और वेनेजुएला का जो हाल किया, वह सबके सामने है*। अगर हम मुफ्तखोरी के टीके से आज नहीं बचे तो *कल कैंसर/एड्स जैसी लाइलाज बीमारी के लिए तैयार रहें*।

*अपील:*

*"सावधान दोस्तो, थोड़ा दर्द सहन कर लो पर बीमारी का इलाज पक्का करो"*, डॉ. मुल्तानी ने लिखा। उन्होंने कहा कि *अगर पंजाब को बचाना है तो अपने-अपने इलाके में काम करने वाले नेता ढूंढो, सिर्फ बातें करने वाले नहीं*, जो मिलकर पंजाब को *सियासी, आर्थिक और प्रबंधकीय तंदुरुस्ती* दे सकें।

_नोट: यह लेख डॉ. दलेर सिंह मुल्तानी के निजी विचार हैं। प्रकाशक का इससे सहमत होना आवश्यक नहीं है।_

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